यूपी में पावर क्राइसिस: सीएम योगी करेंगे हाईलेवल बैठक, दो एक्सईएन सस्पेंड

लखनऊ|1 घंटा पहले
सीएम योगी करेंगे हाईलेवल बैठक, दो एक्सईएन सस्पेंड

प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। कई जिलों में घंटों की कटौती और बार-बार ट्रिपिंग से जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बढ़ते जनाक्रोश और चरमराती बिजली व्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बिजली आपूर्ति और कटौती की स्थिति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि बैठक में बिजली विभाग के सीनियर अफसरों से जवाब-तलब किया जाएगा और आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए कड़े निर्देश जारी हो सकते हैं।

बिजली संकट के बीच उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद और मेरठ के दो अधिशासी अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता राहुल और मेरठ के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार पर लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की गई है। राहुल को मेरठ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, लगातार ट्रिपिंग और बिजली आपूर्ति में बाधा को लेकर सरकार बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।

बिजली कटौती पर कई शहरों में फूटा लोगों का गुस्सा

प्रदेश के कई शहरों में शुक्रवार रात बिजली संकट को लेकर लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। राजधानी लखनऊ में घंटों बिजली गुल रहने से नाराज लोग देर रात सड़कों पर उतर आए। कुछ स्थानों पर लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और एक जूनियर इंजीनियर की गाड़ी का टायर तक पंक्चर कर दिया। वाराणसी में बिजली कटौती से परेशान एक युवक बिस्तर लेकर सीधे पावर हाउस पहुंच गया और वहीं सोने की जिद पर अड़ गया। वहीं कानपुर में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनोखा प्रदर्शन करते हुए “स्वर्गीय बिजली व्यवस्था” लिखे पोस्टर पर फूल चढ़ाकर मोमबत्ती जलाते हुए श्रद्धांजलि दी।

अखिलेश और ऊर्जा मंत्री के बीच जुबानी जंग तेज

बिजली संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “महा विद्युत आपदा” करार दिया। उन्होंने कहा कि बिजली संकट के लिए सरकार, बिजली मंत्री और भ्रष्ट ठेकेदार जिम्मेदार हैं। साथ ही उन्होंने जनता से अपील की कि लाइनमैन और कनिष्ठ कर्मचारियों पर गुस्सा न निकाला जाए, क्योंकि संविदा कर्मचारियों की छंटनी के बाद वे भारी दबाव में काम कर रहे हैं। इस बयान पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 19 बिंदुओं में जवाब देते हुए कहा कि “जब भी आईना उठाइए, पहले खुद देखिए, फिर दूसरों को दिखाइए।” मंत्री ने सपा सरकार के दौरान बिजली आपूर्ति की स्थिति का भी जिक्र करते हुए वर्तमान व्यवस्था को बेहतर बताया।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची बिजली की मांग

भीषण गर्मी के कारण प्रदेश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूपी में बिजली की मांग 30 हजार मेगावाट के करीब पहुंच चुकी है। सरकार को कमी पूरी करने के लिए बिजली एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है, लेकिन ट्रांसमिशन क्षमता सीमित होने के कारण आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल प्रदेश की ट्रांसमिशन क्षमता लगभग 31,500 मेगावाट है और इससे अधिक लोड पड़ने पर उपकेंद्रों के ट्रिप होने का खतरा बना रहता है।

नव्य जागरण

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