पांच जून तक दिल्ली जिमखाना क्लब खाली करने का आदेश: केंद्र ने वापस मांगी 27.3 एकड़ जमीन, 113 साल पुराना ऐतिहासिक क्लब

दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन के बीच बड़ा विवाद सामने आया है। केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी जोन में स्थित 113 साल पुराने ऐतिहासिक क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का आदेश जारी किया है। केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस द्वारा 22 मई को क्लब सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सरकार को क्लब के कब्जे वाली 27.3 एकड़ जमीन रक्षा ढांचे को मजबूत करने, संस्थागत जरूरतों और अन्य सरकारी परियोजनाओं के लिए चाहिए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति की ओर से इस जमीन की लीज समाप्त कर दी गई है।
यह फैसला सामने आते ही राजधानी के राजनीतिक, प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। क्लब प्रबंधन और इसके सदस्यों ने सरकार के इस कदम का विरोध जताया है। क्लब सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उनका कहना है कि क्लब से किसी प्रकार का सुरक्षा खतरा नहीं है और सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
ब्रिटिश काल की विरासत पर संकट
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1913 में ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। क्लब का मौजूदा भवन 1930 के दशक में तैयार किया गया था। इसे प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्टरॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था, जिन्होंने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतों का भी डिजाइन तैयार किया था। यह क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के नजदीक स्थित है, जिस कारण यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता है। सरकार का कहना है कि बदलती सुरक्षा जरूरतों और रणनीतिक परियोजनाओं के मद्देनजर इस जमीन का उपयोग अब राष्ट्रीय महत्व के कार्यों के लिए किया जाएगा।
हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक रहा क्लब
पिछले एक सदी से अधिक समय से दिल्ली जिमखाना क्लब राजधानी की हाई-सोसायटी संस्कृति और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता रहा है। यहां की सदस्यता हासिल करना बड़े सरकारी पद या सामाजिक प्रतिष्ठा के बराबर समझा जाता है। क्लब में 26 ग्रास टेनिस कोर्ट, स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, स्विमिंग पूल, लाउंज बार और 43 कॉटेज जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यह स्थान लंबे समय से नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों, न्यायाधीशों, उद्योगपतियों, वरिष्ठ राजनेताओं और पुराने कारोबारी परिवारों का प्रमुख सामाजिक केंद्र रहा है। क्लब की विशिष्ट सदस्यता और सीमित पहुंच को लेकर भी समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं।
वर्षों से चल रहा है कानूनी और प्रशासनिक विवाद
केंद्र सरकार और क्लब के बीच विवाद नया नहीं है। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने क्लब के कामकाज की जांच शुरू कराई थी। क्लब पर सदस्यता में पक्षपात, वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। इसके बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल तक पहुंचा। दिसंबर 2021 में ट्रिब्यूनल ने क्लब की चुनी हुई प्रबंधन समिति को हटाकर सरकार की ओर से प्रशासक नियुक्त कर दिया था। बाद में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने भी केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को उचित ठहराया और माना कि क्लब के प्रशासन में गंभीर कमियां थीं। सरकार का आरोप था कि क्लब कुछ प्रभावशाली लोगों के सीमित समूह तक सिमट गया है और आम लोगों को सदस्यता प्रक्रिया में उचित अवसर नहीं दिए जा रहे। अब केंद्र सरकार के ताजा आदेश के बाद यह विवाद और गहरा सकता है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।









