कार्डियक अरेस्ट से थम गईं 'अन्ना' की सांसें: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का हुआ निधन, 100 से ज्यादा फिल्मों में दिखा अनोखे अभिनय का दम

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक, नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। उनके निधन के बाद मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।

नाना पाटेकर ने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1989 की ‘परिंदा’ में अन्ना का किरदार उनके करियर के यादगार पात्रों में शामिल रहा। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके बाद 1994 में ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और 1996 में ‘अग्निसाक्षी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इस तरह उनके खाते में तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड रहे। उन्हें चार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

कॉमेडी में भी जमाया रंग

नाना पाटेकर की अभिनय क्षमता सिर्फ गंभीर और दमदार किरदारों तक सीमित नहीं रही। 2007 की फिल्म ‘वेलकम’ में उन्होंने गैंगस्टर उदय शेट्टी का कॉमिक किरदार निभाकर दर्शकों को खूब हंसाया। फिल्म का यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि इसके संवादों पर लंबे समय तक मीम्स बनते रहे। ‘कंट्रोल उदय... कंट्रोल!’ वाला संवाद आज भी उनके सबसे चर्चित डायलॉग्स में गिना जाता है। वह ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में नजर आए।

‘प्रहार’ के लिए ली सैन्य ट्रेनिंग

फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में आर्मी मेजर की भूमिका को वास्तविक बनाने के लिए नाना पाटेकर ने भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की। इसके बाद वह टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े और उन्हें मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद तक सेवाएं दीं और 2013 में रिटायर हुए।

कारगिल युद्ध में 15-20 दिन क्यूआरटी के साथ रहे

सेना के प्रति नाना का जुड़ाव सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं था। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेकर करीब 15 से 20 दिन अग्रिम इलाकों में सेना के साथ बिताए। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे क्षेत्रों में गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सेना की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) के साथ भी समय बिताया। नाना कई मौकों पर जवानों को देश का असली हीरो बता चुके थे और कहते थे कि देश के लिए हर व्यक्ति को अपनी तरफ से कुछ करना चाहिए।

पीएम मोदी ने जताया शोक

नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया। उन्होंने कहा कि नाना जैसे कलाकार बहुत कम होते हैं, जिनमें अभिनय की इतनी गहराई, अलग पहचान और प्रभावशाली मौजूदगी हो। उन्होंने अलग-अलग किरदारों में विविधता और रचनात्मकता दिखाई। पीएम ने कहा कि नाना अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों के लिए भी पहचाने जाते थे। हिंदी और मराठी सिनेमा में उनका योगदान बेहद बड़ा रहा। उनके निधन से भारतीय सिनेमा में एक गहरी कमी पैदा हुई है। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार, दोस्तों और करोड़ों प्रशंसकों के प्रति संवेदना जताते हुए श्रद्धांजलि दी।

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