परमाणु समझौते पर अडिग हुआ ईरान: एनरिच्ड यूरेनियम नहीं जाएगा बाहर, तेल प्रतिबंध हटाने समेत सात शर्तों पर दिया जोर

एनरिच्ड यूरेनियम नहीं जाएगा बाहर, तेल प्रतिबंध हटाने समेत सात शर्तों पर दिया जोर

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने एनरिच्ड यूरेनियम का एक ग्राम भी दूसरे देश नहीं भेजेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा कायम करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और तेहरान की सभी शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी कहा कि अमेरिका को ईरान का विश्वास हासिल करने के लिए उसकी सात शर्तें पूरी करनी होंगी। ये मांगें पिछले महीने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के मुद्दे पर रखी गई थीं।

ईरान की प्रमुख मांगों में उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त करना, तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकना शामिल है। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई भी कह चुके हैं कि हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब पहुंच चुके एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए। तेहरान का रुख साफ है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम के भंडार पर किसी समझौते से पहले अमेरिका को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा।

परमाणु कार्यक्रम समझौते की राह में बना बाधा

ईरान का परमाणु कार्यक्रम दोनों देशों के बीच समझौते की राह में बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता में ठोस कमी करनी होगी। उनके मुताबिक, अमेरिकी मांगों को स्वीकार करने और दोनों देशों के बीच करीब आठ महीने से जारी युद्ध समाप्त करने के लिए यह जरूरी है। एनरिच्ड यूरेनियम ऐसा यूरेनियम होता है, जिसमें एक विशेष परमाणु समस्थानिक का अनुपात बढ़ाया जाता है। इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा उत्पादन के साथ परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है।

60 प्रतिशत एनरिच्ड पर पश्चिमी देशों की चिंता

अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देश ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश का आरोप लगाते रहे हैं। ईरान के यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड करने से उनकी चिंता बढ़ी है। नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए आमतौर पर इतने ऊंचे स्तर की जरूरत नहीं होती, जबकि हथियारों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम का संवर्धन स्तर करीब 90 प्रतिशत होता है। हालांकि, ईरान इन आरोपों को खारिज करता है। उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।

ट्रम्प ने परमाणु हथियार रोकने की बात दोहराई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 अक्टूबर को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने दावा किया कि यदि ईरान के पास ऐसे हथियार हुए तो वह उनका इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने पहाड़ के नीचे बने ईरान के परमाणु ठिकाने को निशाना बनाने की संभावना भी जताई, लेकिन कहा कि अमेरिका इस युद्ध में परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करेगा।

पाकिस्तान बातचीत बहाल कराने में जुटा

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयास में तेहरान पहुंचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने उनसे मुलाकात की। बैठक में क्षेत्रीय हालात और मध्यस्थता के प्रयासों पर चर्चा हुई। मुनीर ने संसद के स्पीकर गालिबाफ से भी मुलाकात की। पाकिस्तान इससे पहले भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर चुका है। दिए गए विवरण के मुताबिक, जून में उसकी कोशिशों से अंतरिम शांति समझौता हुआ था, लेकिन कुछ सप्ताह बाद संघर्ष फिर शुरू हो गया।

28 फरवरी से जारी है सैन्य संघर्ष

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है, जबकि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है।

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