कुत्ते के काटने पर ना आजमाएं घरेलू नुस्खा: लापरवाही बरतना हो सकता है जानलेवा, तत्काल लें डॉक्टर की सलाह

भागदौड़ भरी जिंदगी और गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों के बीच कुत्ते का काटना एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है। कई बार लोग जागरूकता की कमी के कारण कुत्ते के काटने पर अस्पताल जाने के बजाय घर पर ही हल्दी, मिर्च, तेल या मिट्टी लगाने जैसे घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह लापरवाही बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि इससे रेबीज जैसी घातक बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
अक्सर लोग एंटीसेप्टिक समझकर घाव पर हल्दी का लेप लगा देते हैं या खून रोकने के लिए मिर्च पाउडर या चूना लगा देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा करने से घाव के अंदर मौजूद कुत्ते की लार और रेबीज का वायरस बाहर निकलने के बजाय अंदर ही लॉक हो जाता है। इसके अलावा, ये चीजें घाव में जलन और गंभीर संक्रमण को बढ़ा देती हैं, जिससे बाद में डॉक्टर के लिए भी घाव को साफ करना और उसकी गंभीरता को समझना मुश्किल हो जाता है।
कुत्ते के काटने वाली जगह को 15 मिनट तक धोएं
अगर किसी को कुत्ता या कोई अन्य जानवर काट ले, तो बिना घबराए काटने वाली जगह पर 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोएं। कुत्ते के काटते ही सबसे पहले मरीज को नल के बहते पानी के नीचे ले जाएं। घाव को किसी भी साधारण या एंटीसेप्टिक साबुन और पानी से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। ऐसा करने से लार में मौजूद रेबीज वायरस की मात्रा काफी हद तक कम हो जाती है। दर्द या जलन होने पर भी धुलाई बीच में न रोकें।
घाव को खुला और ढीला रखें
यदि घाव से खून आ रहा है, तो एक साफ कपड़े या स्टेराइल पट्टी से हल्के हाथों से दबाकर खून रोकने की कोशिश करें। घाव को खुला रखें या ढीला ढकें। घाव पर कोई भी भारी पट्टी या कसकर पट्टी बिल्कुल न बांधें। इसे पूरी तरह हवादार रहने दें या बहुत हल्के साफ कपड़े से ढकें। घाव को अच्छी तरह सुखाने के बाद उस पर पोविडोन-आयोडीन या कोई डॉक्टर द्वारा प्रमाणित एंटीसेप्टिक लिक्विड क्रीम लगाई जा सकती है।
डॉक्टर के पास जाना है जरूरी
प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद मरीज को नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल ले जाना अनिवार्य होता है। रेबीज का कोई इलाज नहीं है और लक्षण दिखने के बाद यह शत-प्रतिशत जानलेवा है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर तत्काल एंटी-रेबीज वैक्सीन का कोर्स शुरू करना चाहिए। यह टीका आमतौर पर काटने के दिन, तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन लगाया जाता है। अगर घाव बहुत गहरा है या खून ज्यादा निकला है, तो डॉक्टर तुरंत रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लगाने की सलाह देते हैं, जो वायरस को तुरंत बेअसर करने में मदद करता है। घाव के संक्रमण से बचने के लिए टिटनेस का टीका भी लगवाना जरूरी है।
फिलहाल और खबरें उपलब्ध नहीं हैं।

