शुभ संयोगों के साथ शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि: हाथी पर आएंगी मां दुर्गा, जानिए कैसे करें पूजा

शारदीय नवरात्रि खास मानी जाती है। इसको देखते हुए भक्तों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मां दुर्गा की मूर्ति की स्थापना के लिए जगह-जगह पंडाल सजने लगे हैं। मंदिरों और घरों में भी साफ-सफाई शुरू हो गई है। पूजन-सामग्री की दुकानें भी जगह-जगह सज गई हैं। खरीदारों की भीड़ भी जुटने लगी है। मान्यता है कि इन दिनों देवी मां की पूजा-अर्चना से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से माता रानी की उपासना करते हैं। आमतौर पर शारदीय नवरात्रि को बड़े नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसके साथ ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। साल 2026 में नवरात्रि की शुरुआत कई शुभ संयोगों के साथ हो रही है।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात करीब 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर रविवार से होगी। मान्यता है कि यदि नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो माता का वाहन हाथी माना जाता है।
कलश स्थापना का मुहूर्त
11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
शारदीय नवरात्रि कैलेंडर
11 अक्टूबर - नवरात्रि का पहला दिन, मां शैलपुत्री पूजा और घट स्थापना
12 अक्टूबर - नवरात्रि का दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
13 अक्टूबर - नवरात्रि का तीसरा दिन, मां चंद्रघंटा पूजा
14 अक्टूबर - नवरात्रि का चौथा दिन, मां कूष्मांडा पूजा
15 अक्टूबर - नवरात्रि का पांचवां दिन, मां स्कंदमाता पूजा
16 अक्टूबर - नवरात्रि का छठा दिन, षष्ठी पूजा और मां कात्यायनी पूजा
17 अक्टूबर - नवरात्रि का सातवां दिन, सप्तमी पूजा और मां कालरात्रि पूजा
18 अक्टूबर - नवरात्रि का आठवां दिन, अष्टमी पूजा
19 अक्टूबर - नवरात्रि का नौवां दिन, नवमी पूजा
पूजा सामग्री
लोटा, जल, गंगाजल, मौली, सुपारी, दूर्वा और जटा नारियल।
लाल चुनरी, वस्त्र और माता के श्रृंगार की सामग्री जैसे बिंदी, सिंदूर, गजरा और चूड़ियां।
फूल-माला, पान, सूखा नारियल और साफ-साबुत चावल।
पीतल का दीया, रुई की बत्ती, घी या तिल का तेल, कपूर और धूप-बत्ती।
कंघी, शीशा, पायल, इत्र, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री।
मिट्टी, मिट्टी का पात्र, जौ, कलावा, बताशे, फल और मिठाई।
अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान की सामग्री भी रख सकते हैं।
पहले दिन ऐसे करें पूजा
सबसे पहले एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद देवी मां का विधि-विधान से श्रृंगार कर उन्हें लाल चुनरी अर्पित करें। माता को फूल और इत्र चढ़ाएं। साथ ही फल, मिठाई, मेवे और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें और उसके ऊपर नारियल व लाल चुनरी रखें। कलश स्थापना के साथ जौ भी बोएं। फिर दीप जलाकर देवी मां की पूजा-अर्चना करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में माता रानी की आरती करें।
बनेंगे ये शुभ संयोग
ज्योतिषियों के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन सूर्योदय के समय हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का प्रभाव रहेगा। इसके अलावा गजकेसरी योग का साया भी रहेगा। वहीं, नवरात्रि के दौरान देवगुरु बृहस्पति और सूर्य के बीच भी शुभ संबंध बनने से इसका खास असर पर्व पर रहेगा। वहीं, नवरात्रि के दौरान करीब चार से पांच दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन सकता है। इसके अलावा करीब दो दिन अमृत सिद्धि योग का संयोग भी रहेगा।
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