राम नाम पर फर्जी रोजगार का खेल: घोटाले को लेकर कांग्रेस का भाजपा पर हमला, चंदा-चढ़ावा चोरी के बाद नया बवाल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात बिछने लगी है। केंद्र और राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के खिलाफ विपक्ष ने एक नया मोर्चा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में 'विकसित भारत-जी राम जी योजना'के तहत क्लोन ऐप के जरिए फर्जी हाजिरी दर्ज कराने का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने यह आरोप भाजपा पर लगाया है। पहले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के नाम पर चंदे की कथित धांधली की गई और अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए फर्जी रोजगार का रैकेट चलाया जा रहा है।
क्लोन ऐप से बड़ा फर्जीवाड़ा
कांग्रेस के दिग्गज नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस डिजिटल घोटाले को उजागर किया। सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर जिले में यह घोटाला किया गया। सरकारी योजना 'विकसित भारत-जी राम जी' के क्रियान्वयन में भारी तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताएं पाई गई हैं। इस योजना के तहत काम करने वाले कर्मियों या लाभार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक फर्जी 'क्लोन ऐप' तैयार किया गया। इस डुप्लीकेट ऐप के जरिए डिजिटल रूप से फर्जी हाजिरी लगाई गई। सरकारी खजाने से धन का बंदरबांट किया जा रहा था। जबकि धरातल पर काम पूरी तरह गायब था।
गोरखपुर में भी ऐसा ही खेल होने का दावा
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया है। यह उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले गोरखपुर जिले में भी इसी तरह का मामला हुआ था। 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के तहत फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट पकड़ा गया था। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि जब कांग्रेस पार्टी ने गोरखपुर में इस मामले को उठाया था। भ्रष्टाचार और डिजिटल धांधली के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया गया था। तब चौतरफा घिरी सरकार को मजबूरन इस पर अपनी सफाई और आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। इसके बावजूद, अब संत कबीरनगर में भी ठीक वैसा ही खेल दोहराया गया है।
कांग्रेस का तीखा तंज
कांग्रेस ने मामले को नैतिक अस्मिता से जोड़ते हुए भाजपा सरकार की नीति और नीयत दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है। राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों में चंदे और चढ़ावे को लेकर पारदर्शिता की कमी रही है। अब भगवान राम के नाम पर चल रही सरकारी योजनाओं में युवाओं को 'फर्जी रोजगार' का झुनझुना थमाया जा रहा है। रोजगार केवल कागजों और हैक किए गए ऐप्स तक सीमित रह गया है। जिससे प्रदेश के पढ़े-लिखे युवाओं के साथ एक बड़ा भद्दा मजाक हो रहा है।
विपक्ष के आक्रामक तेवर
यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती दे रहे हैं। और अखिलेश यादव वाराणसी में मेट्रो व रोजगार के वादों के साथ भाजपा को घेर रहे हैं। रोजगार और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के इस नए मुद्दे को उठाकर कांग्रेस ने साफ कर दिया है। कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के 'राष्ट्रवाद' और 'धार्मिक विकास' के एजेंडे को 'डिजिटल करप्शन' और 'बेरोजगारी' के काउंटर-नैरेटिव से घेरेगी। फिलहाल इस तकनीकी फर्जीवाड़े और कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों कोई जवाब नहीं आया है। उत्तर प्रदेश प्रशासन या भाजपा संगठन की तरफ से कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
फिलहाल और खबरें उपलब्ध नहीं हैं।

