पीएम मोदी ने एशियाई खेलों के खिलाड़ियों से की मुलाकात: कहा-जो खेलेगा-वो खिलेगा, 85 मेडल वाली टीम इंडिया की सराहना की

नई दिल्ली|
 कहा-जो खेलेगा-वो खिलेगा, 85 मेडल वाली टीम इंडिया की सराहना की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में एशियन गेम्स 2026 के भारतीय दल से मुलाकात की। उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित कर उनके प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि बीते 12 वर्षों में स्पोर्ट्स कल्चर पर धैर्य के साथ काम हुआ है, जिसका नतीजा अब दिख रहा है। आप भी खेलते रहिए, खिलते रहिए, आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं।

एशियन गेम्स 2026 के भारतीय दल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित किया और प्रदर्शन को सराहा। पीएम ने कहा कि बीते एक दशक में देश में जो व्यवस्थाएं विकसित हुई हैं उससे युवाओं को भरोसा हुआ है कि उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए देश का पूरा सामर्थ्य उनके साथ खड़ा है। हमारा प्रयास सिर्फ खेलने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। कोचिंग, फिजियोथेरेपी में भी नए अवसर बन रहे हैं। खेलों के साथ-साथ इससे जुड़े प्रोफेशन भी आगे बढ़ रहे हैं। आज हम जिस किसी भी फील्ड में अपनी सफलता के लिए परिश्रम तो करना ही है, साथ ही नई पीढ़ी को गढ़ने की जिम्मेदारी भी उठानी है।

बोले-जब समय मिले अपने गांव, शहर के बच्चों से मिलिए

इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स जो होंगे, उसमें आप उन बच्चों की मदद करें जो आगे बढ़ने का सपना देख रहे हैं।'जब समय मिले अपने गांव, अपने शहर के बच्चों से मिलिए। आपका अनुभव उन बच्चों के बहुत काम आ सकता है। आपकी छोटी सी बात उन्हें खेलों में आगे बढ़ने का मौका दे सकती है। देश के युवाओं को आपसे केवल स्पोर्ट्स की ही प्रेरणा नहीं मिलती है, खेल हमें जीवन में अनुशासन सिखाते हैं, हार से जीतने की सीख खेलों से मिलती है। एक समय तक लक्ष्य के लिए नियमित रहना है, स्पोर्ट्स हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है। यही स्पोर्ट्समैन स्पिरिट जीवन भर काम आती है। जो खेलेगा वो खिलेगा। आप भी खेलते रहिए, खिलते रहिए, आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं।

आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताकत

आपका यह उत्साह, ये आत्मविश्वास नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इसी आत्मविश्वास के साथ हमें भारत को नई बुलंदियों तक पहुंचाना है।'पीएम ने आगे कहा, 'सपने एक दिन में पूरे नहीं होते। इसमें वर्षों का धैर्य और लगातार परिश्रम अनिवार्य होता है। भारत ने भी बीते 12 वर्षों में बहुत धैर्य के साथ अपने स्पोर्ट्स कल्चर पर काम किया है। पहले गिने-चुने मेडल आते थे। कितने खेल ऐसे थे, जिनका तो पता ही नहीं होता था। पहले ओलंपिक जैसा इवेंट होता था और आधे से ज्यादा खेलों में हमारा कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं होता था। अब सोचिए जब हम कंप्लीट ही नहीं करेंगे तो मेडल कहां से लाएंगे। हमने संकल्प लिया कि हम इस निराशावादी मानसिकता को हटाएंगे। इसका नतीजा यह हुआ कि हर खेल में हमारा प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है। यह बदलाव आया है उसी स्पिरिट से, जिसकी बदौलत आपने क्षमता हासिल की है।

टॉप्स स्कीम के तहत खिलाड़ियों को मिल रहा 50 हजार महीना

उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में निरंतरता से प्रयास किया गया है। दूरगामी विजन से काम किया गया है। जैसे कि आप सब जानते हैं, हमने टॉप्स स्कीम और खेलो इंडिया शुरू किया। खेलो इंडिया के लिए हमने 36 हजार से ज्यादा एलोकेट किए। आज देश में 1000 से ज्यादा खेलो इंडिया सेंटर बनाए गए हैं। टॉप्स स्कीम के तहत खिलाड़ियों को 50 हजार रुपये महीने मिल रहा है। अगर किसी खेल में कोचिंग के लिए देश से बाहर जाने की जरूरत है, तो सरकार उसकी भी आर्थिक सहायता दे रही है। खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मौके मिले, उसके लिए विंटर गेम्स, सांसद खेल प्रतियोगिता शुरू की गई। हमारे दिव्यांग खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उनके लिए भी बेहतर खेल सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। आज हर खिलाड़ी को भरोसा होता है कि देश उसके साथ है। जब खिलाड़ी को यह भरोसा होता है, तो वह देश के लिए क्या कर दिखाता है, इसके आप उदाहरण हैं।

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