रेलवे के 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस: दिव्यांग पेंशन की सीमा घटी, योजनाओं के नाम बदले

केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले रेलवे के करीब 11.40 लाख पात्र कर्मचारियों को 78 दिन का उत्पादकता आधारित बोनस देने की मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस पर 2,009 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही दिव्यांग पेंशन के नियमों में बदलाव और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत संचालित पेंशन योजनाओं के नाम बदलने को भी मंजूरी दी गई।
रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाले उत्पादकता आधारित बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन 7,000 रुपये तय किया गया है। इस आधार पर 78 दिन के बोनस की रकम करीब 17,951 रुपये बनती है। हालांकि, वास्तविक भुगतान कर्मचारी की पात्रता और लागू नियमों के अनुसार होगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे कर्मचारी त्योहारों के दौरान भी ट्रैक, इंजन और वर्कशॉप में लगातार ड्यूटी करते हैं। उनकी मेहनत को देखते हुए बोनस देने का निर्णय लिया गया है।
दिव्यांग पेंशन के लिए पात्रता सीमा 40 प्रतिशत
सरकार ने दिव्यांग पेंशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब पात्रता के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत शून्य से 79 वर्ष तक के पात्र दिव्यांगों को हर महीने 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को 625 रुपये की सहायता मिलेगी। नए नियमों और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी सरकार तीन महीने के भीतर जारी करेगी।
पेंशन योजनाओं से हटेगा इंदिरा गांधी का नाम
कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना करने का फैसला किया है। इसके तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के नाम भी बदले जाएंगे। अब इन्हें क्रमशः प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना और प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कहा जाएगा। राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम भी प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना होगा।
1995 में शुरू हुई थी सामाजिक सहायता योजना
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को आर्थिक मदद देने के उद्देश्य से हुई थी। यह संविधान के अनुच्छेद 41 में उल्लिखित राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों से जुड़ा है। योजना का खर्च केंद्र सरकार उठाती है। दिव्यांग पेंशन के नियमों में बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप बताया गया है। इस कानून में 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता को बेंचमार्क दिव्यांगता माना गया है।
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