दिल्ली एसआईआर विवाद: सुप्रीम कोर्ट के चुनाव आयोग से तीखे सवाल, 43 लाख वोटर्स का मामला

दिल्ली में वोटर लिस्ट में संशोधन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने उन लाखों मतदाताओं का मुद्दा उठाया जिन्हें 'अस्थायी रूप से अनुपस्थित' होने के कारण लिस्ट से बाहर कर दिया गया है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताते हुए पूछा, जब किसी व्यक्ति का नाम 2026 की मूल मतदाता सूची में पहले से दर्ज था, तो उसका पता बदलने पर उसे नए मतदाता की तरह 'फॉर्म-6' भरने को क्यों कहा जा रहा है? अगर कोई नागरिक दिल्ली के भीतर ही एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हुआ है, तो आयोग उसके पुराने रिकॉर्ड के आधार पर पते को खुद क्यों अपडेट नहीं कर सकता?
चुनाव के समय लोग अधिक सक्रिय रहते है
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने साफ किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति का रोजी-रोटी या काम के सिलसिले में अस्थायी रूप से कहीं जाना 'स्थायी रूप से शिफ्ट' होना नहीं है। ऐसे लोगों को नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए जटिल प्रक्रिया से गुजारना गलत है। "चुनाव के समय लोग अधिक सक्रिय रहते हैं, लेकिन आम दिनों में वे अपनी रोजी-रोटी और काम में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में मुमकिन है कि अस्थायी पते वाले या गरीब नागरिकों को पता ही न चले कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब हो चुका है।"
वोटर लिस्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत में दिल्ली में कुल 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। हालांकि, हाल ही में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में यह संख्या घटकर केवल 97.53 लाख रह गई है। इसका मतलब है कि ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 47.5 लाख नाम हटाए गए हैं, जिनमें से लगभग 43 लाख नागरिकों को 'शिफ्टेड या अनुपस्थित' श्रेणी में रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दो सप्ताह का दिया समय
अदालत के सख्त रुख के बाद चुनाव आयोग ने माना कि ड्राफ्ट स्तर पर नाम पूरी तरह खारिज नहीं होते हैं। आयोग ने अदालत में सहमति जताई कि वह छूटे हुए और योग्य मतदाताओं को मौका देने के लिए आवेदन स्वीकार करने की अंतिम समयसीमा को आगे बढ़ाएगा ताकि कोई भी नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस पूरी प्रक्रिया पर दोबारा विचार करे और सबसे सरल उपाय तलाशे। अदालत ने आयोग को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई होगी।
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