आगरा में नकली दवाओं का भंडाफोड़: पुलिस ने बरामद की पांच करोड़ की नकली दवाएं, कुख्यात दवा माफिया से जुड़े मिले तार

आगरा|
पुलिस ने बरामद की पांच करोड़ की नकली दवाएं, कुख्यात दवा माफिया से जुड़े मिले तार

आगरा में स्वास्थ्य विभाग, औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने नकली दवाओं के एक बहुत बड़े काले कारोबार का भंडाफोड़ किया है। आगरा के मलपुरा थाना क्षेत्र के धनौली में एक खंडहरनुमा मकान के भीतर कबाड़ के बीच छिपाकर रखे गए गोदाम पर छापेमारी कर लगभग पांच करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली दवाएं बरामद की गई हैं। इस पूरे रैकेट के तार आगरा के कुख्यात दवा माफिया हिमांशु अग्रवाल से जुड़े मिले हैं।

औषधि विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि धनौली में आबादी के बीच एक मकान में अवैध रूप से दवाओं का भंडारण किया गया है। जब टीम ने मंगलवार को इकरार नाम के व्यक्ति के घर के पास बने खंडहर कमरे में छापा मारा, तो वहां टिन शेड के नीचे कबाड़ और टूटे-फूटे सामान के पीछे भारी मात्रा में दवाओं के कार्टन 33 बोरे के साथ बरामद हुए। बरामद की गई दवाओं में नामी मल्टीनेशनल कंपनियों के रैपर वाली डायबिटीज,दर्द निवारक, एंटी-एलर्जिक और हृदय रोग से जुड़ी गंभीर दवाएं शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बिना किसी तय मानकों के इन जीवन रक्षक दवाओं को बेहद अस्वच्छ हालातों में रखा गया था।

जेल से छूटते ही फिर शुरू किया कारोबार

पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड दवा माफिया हिमांशु अग्रवाल है। गौर करने वाली बात है कि अगस्त 2025 में जब यूपी एसटीएफ और ड्रग विभाग ने हिमांशु के ठिकानों पर छापा मारा था, तो उसने खुद को बचाने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

लाइसेंस रद्द होने के बावजूद बंद नहीं किया धंधा

दिसंबर 2025 में कोर्ट से जमानत पर बाहर आने के बाद, ड्रग विभाग द्वारा उसकी फर्म का लाइसेंस रद्द किए जाने के बावजूद उसने अपना धंधा बंद नहीं किया। हिमांशु ने अपने पिता के नाम पर चोरी-छिपे किराए के नए गोदाम लिए और ट्रांसपोर्टर आशीष जैन के माध्यम से आगरा व आसपास के जिलों में दोबारा नकली दवाओं की बड़ी सप्लाई चेन खड़ी कर दी।

तीन गुर्गे गिरफ्तार

पुलिस और औषधि विभाग की मुस्तैदी से इस मामले में अब तक तीन आरोपी इकरार, शामिन और मुकीम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मलपुरा थाने में इस सिंडिकेट के पांच सदस्यों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि, मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल और उसका मददगार ट्रांसपोर्टर पुलिस की छापेमारी से ठीक दो दिन पहले अपने अन्य ठिकानों को खाली कर फरार हो गए, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

जांच के लिए भेजे गये दवाओं के सैंपल

विभाग ने बरामद दवाओं के 24 से अधिक सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन नकली दवाओं का निर्माण कहां हो रहा था और इन्हें किन-किन मेडिकल स्टोर्स के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जा रहा था।

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