30 लाख दीयों से जगमगाया अयोध्या: निकाली गई 21 भव्य झांकियां, रामायण के सात कांडों को दर्शाया गया

अयोध्या में शनिवार को 10वां दीपोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। सरयू नदी के किनारे 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाए जा रहे हैं। इस बार नया रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इसी के साथ लेजर शो भी शुरू हो गया है।
इसके पहले अयोध्या में करीब 3 घंटे तक शोभा यात्रा निकाली गई। इसमें 21 झांकियां शामिल थीं। इनमें रामायण के सात कांडों को दर्शाया गया था। दीपोत्सव देखने के लिए मुंबई, गुजरात और बिहार सहित देशभर से लोग पहुंचे हैं।
लेजर शो का किया गया आयोजन
दीपोत्सव के दौरान राम की पैड़ी और सरयू घाट पर भव्य लेजर लाइट शो का आयोजन किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी से घाटों को सजाया गया। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों को 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपकों से रोशन किया जाएगा। इसके लिए घाटों पर दीप सजाने की तैयारियां की गई हैं। दीपोत्सव की शुरुआत करने से पहले उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में भगवान श्रीराम का राजतिलक किया और माता सीता, लक्ष्मण, भरत और गुरु वशिष्ठ को तिलक लगाकर आरती की।
2017 से हो रहा दीपोत्सव का आयोजन
रामकथा पार्क में शनिवार को भगवान श्रीराम के राजतिलक, आरती और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था और राजतिलक किया था। इस प्रसंग की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश में 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस बार 10वें दीपोत्सव समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन हैं।
2017 से हो रहा दीपोत्सव का आयोजन
रामकथा पार्क में शनिवार को भगवान श्रीराम के राजतिलक, आरती और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था और राजतिलक किया था। इस प्रसंग की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश में 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस बार 10वें दीपोत्सव समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन हैं।
उपराष्ट्रपति के रामकथा पार्क पहुंचने पर लोगों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। सजे हुए राम दरबार में उन्होंने संतों का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। राम दरबार में प्रतीकात्मक रूप से भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और गुरु वशिष्ठ मंच पर विराजमान थे। उपराष्ट्रपति ने उनका अभिवादन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपराष्ट्रपति को स्मृति चिह्न भेंट किया। इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दीपोत्सव-2026 समारोह में शामिल होने के लिए महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे। उनके आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर जारी संदेश में कहा गया कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अयोध्या पहुंचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
योगी ने किया संतों का सम्मान
इससे पहले मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को ‘जय श्रीराम’ के जयकारों के बीच रामकथा पार्क में संतों का सम्मान किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान मौजूद थे। प्रतीकात्मक दृश्य में लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान विमान से उतरे जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और साधु-संतों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें रथ पर सवार कराया गया और शोभायात्रा के रूप में मंच तक लाया गया।
क्या बोले उपराष्ट्रपति?
इस दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें सीएम योगी पर पूरा भरोसा है कि उत्तर प्रदेश सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि योगी असंभव को संभव बना देते हैं। इसके लिए उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं। उपराष्ट्रपति ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। हम सभी मिलकर भारत को महाशक्ति बनाने में कामयाब होंगे। अंत में उन्होंने 'जय श्रीराम' और 'जय हिंद' के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हिंदू धर्म में सभी को समान माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि भी एक सामान्य परिवार से आते थे, लेकिन उन्होंने रामायण की रचना की।
यूपी अब सुरक्षित हाथों में
उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जब वह यूपी आते थे तो खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे, लेकिन अब प्रदेश सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने काशी में हुई एक मुलाकात का किस्सा सुनाते हुए कहा कि हाल ही में उन्होंने एक व्यक्ति से पूछा कि क्या अब कोई समस्या है? इस पर उस व्यक्ति ने बताया कि अब कोई समस्या नहीं है। पहले वह छोटे-मोटे अपराध करता था, लेकिन योगी सरकार आने के बाद अब अपना व्यापार कर रहा है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि करीब 500 साल तक राम मंदिर रामभक्तों के लिए अधूरा सपना बना रहा। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी अपनी एक पुरानी याद भी साझा की। उपराष्ट्रपति ने कहा, "मुझे अच्छी तरह याद है कि जब अशोक सिंघल जी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी थी, तब मेरी मां ने अपने सिर पर ईंट उठाई थी। उस समय मेरी मां ने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन देश का उपराष्ट्रपति बनेगा।
सीएम योगी बोले-अनेक कारसेवकों ने बलिदान दिया
सीएम ने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन में संतों और रामभक्तों ने लंबा संघर्ष किया। अशोक सिंघल के मार्गदर्शन में आंदोलन आगे बढ़ा। इसमें अनेक कारसेवकों ने बलिदान दिया। एक समय ऐसा भी था, जब अयोध्या में रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलाई गईं। भगवान श्रीराम का नाम लेने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया। पीएम के नेतृत्व और मार्गदर्शन में अयोध्या अपनी खोई हुई गौरवशाली पहचान फिर से प्राप्त कर रही है। रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं और अयोध्या अपनी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान के साथ एक बार फिर विश्व पटल पर स्थापित हो रही है।
सीएम ने कहा कि श्रीराम भारत के संस्कार हैं। वे राष्ट्र के प्राण और आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। यही वजह है कि शास्त्रों में सात पवित्र पुरियों में अयोध्या को पहली पुरी के रूप में मान्यता दी गई है। अयोध्या के रोम-रोम में श्रीराम विराजमान हैं। अयोध्या ने अपने इतिहास में कई चुनौतियों का सामना किया है। रामभक्तों, संतों, निहंगों और समाज के हर वर्ग ने इनका डटकर मुकाबला किया। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के दौरान कई बार यह सवाल उठा कि क्या रामलला फिर अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो पाएंगे।
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