पुत्र की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा छठ व्रत: कुश में बाधीं गांठ, परिवार की सुख समृद्धि के लिये की कामना
पुत्र की दीर्घायु के लिये बुधवार को महिलाओं ने छठ का व्रत रखा। उन्होंने पुत्र की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार में शांति की कामना की। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर शहर, कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं में काफी उत्साह दिखा। सुबह से ही महिलाएं पूजा की तैयारियों में लगी रहीं।
छठ के मौके पर व्रत रखने वाली महिलाओं ने घरों के बाहर, मंदिरों और बाग-बगीचों में कुश,पलाश जमीन में गाड़ कर विधि-विधान से पूजा की। पूजा की जगह को पलाश, महुआ के पत्तों, कुश और दूसरी पूजन सामग्री से सजाया गया था। इसके बाद महिलाओं ने छठ माता की पूजा करके अपने बेटों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की।
पूरे दिन व्रत रख रिति-रिवाज का किया पालन
पर्व की परंपरा के मुताबिक, महिलाओं ने अपनी संतानों की संख्या के हिसाब से कुश में गांठ बांधी। माना जाता है कि ललई छठ का व्रत संतान के सुख, स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए किया जाता है। महिलाओं ने पूरे दिन श्रद्धा से व्रत रखा और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और घर में खुशहाली की कामना की।
प्रसाद के लिए पूजा स्थल पर पहुंचे लोग
पूजा के लिए महिलाओं ने पहले से ही जरूरी सामग्री इकट्ठा कर ली थी। पूजा के बाद तिन्नी का चावल, महुआ और दही से बना पारंपरिक प्रसाद बांटा। प्रसाद लेने के लिए आसपास की महिलाएं और परिवार के सदस्य भी पूजा वाली जगह पर पहुंच गये। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और ललई छठ की धार्मिक मान्यताओं पर बात की।
त्योहार को लेकर अंचल में बना रहा पारंपरिक माहौल
जिले के खजनी, सहजनवां, बांसगांव, उरूवा, गोला, बड़हलगंज, कौड़ीराम, पिपराइच,सरदानगर, पिपरौली बाजार समेत आसपास के गांवों के कई बाग-बगीचों में महिलाओं के समूह पूजा करते दिखे। ग्रामीण इलाकों में सामूहिक रूप से पूजा करने से पर्व की रौनक और बढ़ गई। पूरे दिन महिलाएं व्रत और पूजा को लेकर उत्साहित रहीं। शाम तक पूजा स्थलों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। ललई छठ के आयोजन से ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक माहौल बना रहा।










