बहराइच में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ: मासूम बच्चे को उतारा था मौत के घाट, डर के साए में जी रहे ग्रामीणों ने ली चैन की सांस

बहराइच|
मासूम बच्चे को उतारा था मौत के घाट, डर के साए में जी रहे ग्रामीणों ने ली चैन की सांस

कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से ग्रामीणों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। कतर्नियाघाट रेंज के अंतर्गत आनंद नगर बलखड़िया गांव के पास वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में बीती रात करीब 11:00 बजे एक खूंखार तेंदुआ कैद हो गया। तेंदुए के पकड़े जाने की खबर मिलते ही पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई और हफ्तों से डर के साए में जी रहे ग्रामीणों ने चैन की सांस ली।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 7 सितंबर 2026 को इसी गांव के रहने वाले मासूम बच्चे राजवीर (पुत्र स्वर्गीय राजू) पर तेंदुए ने उस समय जानलेवा हमला कर दिया था, जब वह घर के पास था। इस हमले में तेंदुए ने बच्चे को मौत के घाट उतार दिया था। इस हृदयविदारक घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ था और पूरे गांव में वन विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश और भारी दहशत व्याप्त थी। इसके अलावा, यह तेंदुआ लगातार ग्रामीणों के कई मवेशियों को भी अपना शिकार बना चुका था।

ग्रामीणों की मांग पर लगाया गया था पिंजरा

मासूम की मौत और मवेशियों पर लगातार हो रहे हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की पुरजोर मांग की थी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने गांव के संवेदनशील इलाके में बकरे का चारा डालकर पिंजरा स्थापित किया था। बृहस्पतिवार रात जैसे ही भूख से तड़पता तेंदुआ चारे के लालच में पिंजरे के भीतर दाखिल हुआ, उसका शटर गिर गया और वह कैद हो गया।

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई

तेंदुए के पिंजरे में फंसने और उसकी दहाड़ सुनने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही रेंजर आशीष गौड़ के नेतृत्व में डिप्टी रेंजर मयंक पांडे, वन दरोगा राधेश्याम और वन रक्षक कौशल किशोर सहित वन विभाग की एक रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। टीम ने पिंजरे को अपने नियंत्रण में लिया और तेंदुए को सुरक्षित कतर्नियाघाट रेंज कार्यालय पहुंचाया।

मेडिकल चेकअप के बाद दी जाएगी रिहाई

कतर्नियाघाट रेंज के अधिकारियों के मुताबिक, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) के आदेशानुसार सबसे पहले पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा तेंदुए का मेडिकल चेकअप किया जाएगा। इसके बाद वन्यजीव प्रोटोकॉल और उच्चाधिकारियों से हरी झंडी मिलने के बाद तेंदुए को आबादी से दूर किसी सुरक्षित और घने आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। फिलहाल, तेंदुए के पकड़े जाने से आनंद नगर और आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों व निवासियों का डर काफी हद तक कम हो गया है।

नव्य जागरण

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