बाराबंकी में रोके जाने पर सड़क पर बैठे चंद्रशेखर: समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई धक्कामुक्की, गोंडा जाने पर पुलिस ने लगाई रोक
भीम आर्मी अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को रविवार को गोंडा जाते समय बाराबंकी के रामनगर में पुलिस ने रोक दिया। आजाद के साथ भीम आर्मी के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्कामुक्की हुई। मौके पर गोंडा और बाराबंकी पुलिस के सीनियर अधिकारी भारी फोर्स के साथ पहुंचे थे। आजाद को आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई और काफी देर तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। आजाद ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने उनकी गाड़ियों और कार्यकर्ताओं पर पत्थर व जूते फेंके।
आजाद ने कहा कि बाराबंकी में उन्हें रोकने की कोई वजह नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह उन्हें रोका गया और पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने उनकी गाड़ियों व कार्यकर्ताओं पर पत्थर और जूते फेंके, उससे यह सवाल उठता है कि प्रदेश में दलितों और पिछड़ों को न्याय कब मिलेगा? मौके पर रोहिणी घावड़ी के समर्थक भी पहुंचे और नारेबाजी शुरू हो गई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई। इस दौरान एक-दूसरे पर पत्थर और जूते फेंके जाने की बात भी सामने आई। पुलिस ने दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं को रोककर स्थिति संभालने की कोशिश की।
सड़क पर बैठकर बोले- गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेंगे
पुलिस द्वारा आगे जाने से रोके जाने के बाद चंद्रशेखर आजाद सड़क पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वह इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनका आरोप था कि यदि यह सब पुलिस के संरक्षण में हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन को लेनी होगी। कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जबरन रोकने और लाठीचार्ज करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, पुलिस की ओर से लाठीचार्ज या इस कार्रवाई को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस अधिकारी लगातार मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे।
विनोद साहनी के परिवार से मिलने जा रहे थे आजाद
चंद्रशेखर आजाद रविवार को विनोद साहनी के रेक्सडिया गांव स्थित घर जाने के लिए निकले थे। उन्होंने बताया कि वह करीब दो महीने पहले विनोद साहनी से मिले थे। विनोद सरनेलगंज से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। आजाद के मुताबिक, उन्होंने विनोद से मेहनत के साथ तैयारी करने और सरकारी ताकत या पैसे के बजाय मेहनत के आधार पर अवसर मिलने की बात कही थी। आजाद ने विनोद की हत्या के मामले में सीबीआई जांच, परिवार की सुरक्षा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि वह गेस्ट हाउस में बैठकर राजनीति नहीं करना चाहते, बल्कि पीड़ित परिवार से मिलना उनका फर्ज है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
आजाद ने कहा कि मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन छह-सात अन्य आरोपी अब तक क्यों नहीं पकड़े गए। उन्होंने इसे न्याय के बजाय अन्याय बताया और कहा कि जांच ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कोई निर्दोष न फंसे और कोई दोषी बच न पाए। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है। आलोचना के कारण किसी की हत्या नहीं होनी चाहिए। आजाद ने कहा कि वह विनोद साहनी के परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाते रहेंगे और उनकी मांगें सीबीआई जांच, परिवार की सुरक्षा, एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की हैं।
दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका
आजाद के रामनगर पहुंचने के दौरान दूसरी तरफ अमित सिंह, आजाद राघवेंद्र सिंह समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ नारे लगाए और रोहिणी घावड़ी को इंसाफ देने की मांग की। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं में बहस होने लगी। रामनगर और बाराबंकी पुलिस ने दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं को रोक दिया। इसके बाद पुलिस चंद्रशेखर आजाद को निरीक्षण भवन के पास ले गई, जहां वह सड़क के बीच बैठ गए। पुलिस और अधिकारियों ने काफी देर तक स्थिति संभालने का प्रयास किया।
विनोद साहनी हत्याकांड के बाद गरमाई सियासत
नौ सितंबर को गोंडा में विनोद साहनी की हत्या के बाद से ही मामला राजनीतिक रूप ले चुका है। कई राजनीतिक नेता पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश कर चुके हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नेताओं की आवाजाही पर रोक लगाई जा रही है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद को गोंडा जाते समय रामनगर में रोकने से सियासी विवाद और बढ़ गया। आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।










