बस्ती का नाम रोशन कर अफसर बना बेटा: पिता ने हाथी पर बैठाकर मनाया जश्न, जुलूस निकालकर किया स्वागत
हर्रैया क्षेत्र में किसान पिता ने बेटे की सफलता को यादगार बनाने के लिए अनोखा स्वागत किया। केशवपुर गांव निवासी अवनीश पांडे का चयन ग्राम विकास अधिकारी के पद पर हुआ तो पिता महेंद्र कुमार पांडे ने 10 हजार रुपये में हाथी किराए पर मंगाया। बेटे के गांव पहुंचते ही उसे हाथी पर बैठाया गया। इसके बाद बैंड-बाजे के साथ करीब एक किलोमीटर तक जुलूस निकाला गया। रास्ते में ग्रामीणों ने तालियां बजाकर अवनीश का स्वागत किया और उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं। बाद में परिवार ने पूरे गांव में मिठाई बांटकर बेटे की सफलता की खुशी साझा की।
केशवपुर गांव निवासी महेंद्र कुमार पांडे किसान हैं। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां अन्नू और अंजू तथा तीन बेटे अनूप, अवनीश और आशीष हैं। अवनीश चौथे नंबर पर हैं। उन्होंने करीब दस साल दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। इस दौरान उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। करीब एक महीने पहले उनका चयन ग्राम विकास अधिकारी के पद पर हुआ। बेटे के चयन की जानकारी मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया और पिता ने उसके भव्य स्वागत की तैयारी शुरू कर दी।
गांव पहुंचते ही हाथी पर बैठाया
अवनीश लखनऊ से बस्ती अपने गांव पहुंचे। गांव के प्रवेश द्वार पर महेंद्र कुमार पांडे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हाथी और बैंड-बाजे लेकर उनका इंतजार कर रहे थे। बेटे के पहुंचते ही पिता ने उसकी पीठ थपथपाई और हाथी पर बैठाया। इसके बाद बैंड-बाजे की धुन के बीच करीब एक किलोमीटर तक जुलूस निकाला गया। हाथी पर सवार अवनीश को देखकर ग्रामीणों ने तालियां बजाईं और फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।
परिवार के शुभ कामों से जुड़ा है हाथी
अवनीश की सफलता पर हाथी से स्वागत करने के पीछे परिवार की पुरानी परंपरा भी जुड़ी है। परिवार के पास पहले हाथी पला हुआ था और घर में होने वाले शुभ कार्यों में उसका इस्तेमाल किया जाता था। फिलहाल परिवार के पास हाथी नहीं है। इसलिए बेटे की सफलता के मौके पर पिता ने 10 हजार रुपये में हाथी किराए पर लिया। स्वागत समारोह के बाद परिवार ने लड्डू बनवाए और गांव के लोगों में बांटे। महेंद्र का कहना है कि बेटे की करीब दस साल की मेहनत आखिरकार सफल हुई, इसलिए उसके स्वागत को खास बनाना चाहते थे।
पढ़ाई से दिल्ली तक का सफर
अवनीश ने कक्षा आठ तक हर्रैया के गजाधर सिंह विद्यालय में पढ़ाई की। इसके बाद राम कुमार विक्रम सिंह इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। आगे उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर चले गए। लगातार प्रयास और कई असफलताओं के बाद उन्हें ग्राम विकास अधिकारी के पद पर सफलता मिली। बेटे की उपलब्धि पर परिवार के साथ पूरा गांव भी उत्साहित नजर आया।











