गोंडा में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर महिला से ठगी: आरबीआई और एनआईए के भेजे फर्जी लेटर, ट्रांसफर किए 21.30 लाख

जिले में साइबर ठगों ने जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर मालवीय नगर निवासी वीना श्रीवास्तव को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और उनसे 21 लाख 30 हजार 600 रुपये ठग लिए। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक खाते में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी होने की धमकी दी। भय और मानसिक दबाव में महिला ने आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग खातों में रकम भेज दी। बाद में आरोपियों से संपर्क टूटने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज किया गया। सोमवार सुबह एफआईआर सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी।
एफआईआर के मुताबिक, महिला के मोबाइल पर 7429557353 नंबर से व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का प्रतिनिधि बताया और दावा किया कि महिला का नाम वित्तीय धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आया है। आरोपी ने आईसीआईसीआई बैंक में उनके नाम से 24 लाख रुपये से जुड़े मामले का हवाला दिया। महिला ने स्पष्ट किया कि उनका उस बैंक में खाता नहीं है, लेकिन आरोपियों ने दबाव बनाना जारी रखा। भरोसा कायम करने के लिए आरबीआई, सेबी और एनआईए के नाम से कथित सरकारी लेटरहेड पर फर्जी पत्र भी भेजे गए। ठगों ने रकम को जांच पूरी होने तक आरबीआई के सरकारी खाते में सुरक्षित रखने और सत्यापन के बाद लौटाने का झांसा दिया।
दो खातों से भेजे रुपये
पीड़िता के अनुसार, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक खाते से 14 लाख 300 रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से सात लाख 30 हजार 300 रुपये ट्रांसफर कराए गए। कुल रकम 21 लाख 30 हजार 600 रुपये है। पैसे मिलने के बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया।
पुलिस ने शुरू की साक्ष्यों की जांच
मामले की विवेचना साइबर थाना प्रभारी सत्य प्रकाश यादव को सौंपी गई है। उन्होंने पीड़िता से बैंक लेनदेन का विवरण, व्हाट्सएप बातचीत और उपलब्ध कॉल रिकॉर्डिंग मांगी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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