गोरखपुर के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. राम रतन बनर्जी का निधन: 60 वर्षों तक की मरीजों की सेवा, 'यश भारती पुरस्कार' से थे सम्मानित

उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित यश भारती पुरस्कार से सम्मानित और गोरखपुर के विख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. राम रतन बनर्जी का निधन हो गया है। उनके निधन से चिकित्सा जगत और स्थानीय समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. बनर्जी पिछले लगभग छह दशकों से लगातार मरीजों की सेवा में समर्पित थे।
डॉ. राम रतन बनर्जी को गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में होम्योपैथी चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय जाता है। उन्होंने अपने लंबे करियर में कभी भी चिकित्सा को व्यवसाय नहीं बनाया, बल्कि इसे सेवा का माध्यम माना। वे बेहद कम फीस या जरूरत पड़ने पर नि:शुल्क दवाएं देकर गरीबों और असहाय मरीजों का इलाज करते थे, जिसके कारण उन्हें 'गरीबों का मसीहा' भी कहा जाता था।
यश भारती से हुए थे सम्मानित
चिकित्सा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान और जनसेवा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें सूबे के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक 'यश भारती पुरस्कार' से नवाजा था। इसके अलावा भी उन्हें देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया था।
चाहने वालों में शोक की लहर
डॉ. बनर्जी के निधन की खबर मिलते ही उनके चाहने वालों, मरीजों और शहर के गणमान्य नागरिकों में शोक छा गया। चिकित्सा जगत के लोगों ने इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है। लोगों का कहना है कि डॉ. बनर्जी का जाना न सिर्फ होम्योपैथी जगत के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा वैक्यूम छोड़ गया है, जिसे भरना नामुमकिन है। अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर शुभचिंतकों की भारी भीड़ उमड़ी हैं।
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