गोरखपुर के डीडीयू में शिक्षकों ने किया उग्र प्रदर्शन: प्रदर्शनकारियों ने कुलपति का हाथ मरोड़ा, बीच सड़क पर की धक्का-मुक्की

गोरखपुर|

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों का आंदोलन अचानक उग्र हो गया। तीन दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने बातचीत के बाद बाहर निकलीं कुलपति प्रो. पूनम टंडन को घेर लिया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी दौरान एक महिला शिक्षक समेत दो प्रदर्शनकारी कुलपति की कार के सामने सड़क पर लेट गए। प्रदर्शन के बीच कुलपति के साथ हाथ पकड़ने और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों पर कुलपति का हाथ मरोड़ने का आरोप भी लगाया गया। रास्ता बाधित होने के कारण कुलपति को अपनी गाड़ी छोड़कर पैदल सरकारी आवास तक जाना पड़ा। प्रदर्शनकारी शिक्षक भी नारेबाजी करते हुए उनके पीछे-पीछे आवास तक पहुंचे। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंट थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन शिक्षकों से वार्ता के लिए प्रशासनिक भवन पहुंचीं। बताया गया कि शिक्षकों की अधिकांश मांगों पर बातचीत के दौरान सहमति बन गई थी। लेकिन संबद्ध कॉलेजों पर लगाई गई फाइन को रद्द करने के मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। कुलपति ने इस मामले को विश्वविद्यालय की संबंधित कमेटी के समक्ष रखने का भरोसा दिया। इसके बाद वार्ता समाप्त हुई और कुलपति प्रशासनिक भवन से बाहर निकलीं। इसी दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने उन्हें रोक लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प की स्थिति बन गई।

दोनों गेट पर जड़े ताले

शिक्षकों का आंदोलन 'गुऑक्टा' के बैनर तले चल रहा है। अनशनकारी शिक्षकों ने प्रशासनिक भवन के दोनों मुख्य गेटों पर ताले लगा दिए। इससे भवन में कामकाज और आवाजाही प्रभावित हुई। पुलिस और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर ताले खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी उदयभान के हस्तक्षेप के बाद शिक्षकों ने अनशन समाप्त किया। प्रदर्शन के दौरान गुऑक्टा के उपाध्यक्ष प्रो. राम अवतार वर्मा, महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी और संयुक्त मंत्री डॉ. प्रद्योत सिंह समेत अन्य शिक्षक मौजूद रहे।

हाथ पकड़ने और धक्का-मुक्की का किया प्रयास

घटना को लेकर विश्वविद्यालय के नियंता एवं विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने कैंट थाने में लिखित तहरीर दी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने कुलपति को रास्ते में रोकने के साथ उनका हाथ पकड़ने और धक्का-मुक्की करने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट करने और जान-माल की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, तनावपूर्ण स्थिति के बीच कुलपति किसी तरह मौके से निकलकर अपने आवास पहुंचीं।

प्रशासन बोला- संवाद रोकने के लिए नहीं लगाए गए थे ताले

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार धीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासनिक भवन में आवाजाही पर रोक कामकाज जारी रखने के उद्देश्य से लगाई गई थी। इसका मकसद शिक्षकों के साथ संवाद रोकना नहीं था। उन्होंने कहा कि रिसर्च सेंटर की मान्यता और लंबित भुगतानों से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई चल रही है। वहीं, लेट फीस से संबंधित निर्णय अधिकृत कमेटियों के स्तर पर लिया गया है और उसे दोबारा बदला नहीं जा सकता।

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