गोरखपुर में पुतला छीनने पर पुलिस-कांग्रेस में झड़प: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया प्रदर्शन, DM कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ता

गोरखपुर|

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन किया। राम प्रसाद बिस्मिल पार्क से कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर बढ़े। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने ‘ज्ञानेश कुमार मुर्दाबाद’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘मोदी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है’ जैसे नारे लगाए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए रस्सी लगाकर बैरिकेडिंग की। पुतला दहन की कोशिश के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं में तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने पुतला अपने कब्जे में ले लिया। प्रदर्शन के दौरान काफी देर तक मौके पर गहमागहमी बनी रही।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध मार्च राम प्रसाद बिस्मिल पार्क से शुरू होकर डीएम कार्यालय तक पहुंचा। भारी संख्या में मौजूद कार्यकर्ता लगातार चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। डीएम कार्यालय के पास पुलिस ने रस्सी लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और कुछ देर तक वहीं नारेबाजी करते रहे। इसके बाद वे वापस लौट गए। कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, उन्हें पद से हटाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की मांग उठाई। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने आज जिला स्तर पर विरोध मार्च और पुतला दहन का कार्यक्रम घोषित किया था।

विरोध प्रदर्शन हमारा संवैधानिक अधिकार

पुतला दहन रोकने पहुंची पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करते रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पुतला दहन से रोककर प्रदर्शन दबाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद कार्यकर्ता पुतला दहन की कोशिश करते रहे, लेकिन पुलिस ने उनके प्रयासों को रोक दिया। मौके पर तैनात पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित रखा।

जिलाध्यक्ष बोले- ‘वोट चोरी कर सरकारें बनवाई गईं’

कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मिलकर वोट चोरी की गई और कई राज्यों में सरकारें बनवाई गईं। तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कथित वोट चोरी के जरिए पद पर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश मंत्री अजय कुमार के चुनाव से जुड़े मामले में काउंटिंग रोककर मोदी को जीत दिलाई गई। हालांकि ये आरोप कांग्रेस जिलाध्यक्ष के राजनीतिक दावे हैं, इनके समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए। तिवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इन्हीं आरोपों के खिलाफ राम प्रसाद बिस्मिल पार्क से डीएम कार्यालय तक प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।

योगी पर भी जिलाध्यक्ष ने साधा निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विपक्षी दलों के चुनाव जीतने पर पुरुषार्थ और हारने पर चुनाव आयोग व ईवीएम को जिम्मेदार ठहराने संबंधी बयान पर भी राजेश तिवारी ने पलटवार किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को लेकर आपत्तिजनक राजनीतिक टिप्पणी की और आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा तथा अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। तिवारी ने कहा कि जनता अब इन दावों और बयानों को समझ चुकी है।

चुनाव आयोग के नोट पर भी उठाए सवाल

जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट में गलतियों को स्वीकार किया गया है। उनके अनुसार, आयोग ने नौ विषयों में सुधार की बात कही है। तिवारी ने इसे कांग्रेस के आरोपों की पुष्टि के तौर पर पेश किया। हालांकि निर्वाचन आयोग ने चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद और प्रक्रिया से जुड़े कांग्रेस के आरोपों को लेकर अलग रुख रखा है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने राजनीतिक गठजोड़ बताया

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के राहुल गांधी से माफी मांगने वाले बयान पर भी तिवारी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग का बचाव इसलिए कर रही है क्योंकि उसे इससे राजनीतिक लाभ मिल रहा है। तिवारी ने कहा कि भाजपा के मंत्री और मुख्यमंत्री लगातार चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दे रहे हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने इसे राजनीतिक गठजोड़ बताते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

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