गोरखपुर बना औद्योगिक निवेश का केंद्र: गीडा में ₹500 करोड़ के निवेश से लगेगी बड़ी दवा फैक्ट्री, 1000 युवाओं को मिलेगा सीधा रोजगार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभावी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब औद्योगिक निवेश का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इसी क्रम में, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल उद्योग को एक बड़ी छलांग मिलने जा रही है। हिमाचल प्रदेश की जानी-मानी दवा कंपनी सिमबायोटेक थेराप्यूटिक्स प्राइवेट लिमिटेड गोरखपुर के धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में दवा निर्माण की एक विशाल इकाई स्थापित करने जा रही है।
कंपनी इस बड़ी परियोजना में ₹500 करोड़ का भारी-भरकम निवेश करने का प्रस्ताव सौंप चुकी है। इस इकाई के शुरू होने से न सिर्फ पूर्वांचल में फार्मा सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लगभग 1,000 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।
धुरियापार में आवंटित होगी 35 एकड़ जमीन
सिमबायोटेक थेराप्यूटिक्स ने अपनी इस प्रस्तावित फैक्ट्री के लिए गीडा प्रशासन से 35 एकड़ भूमि की मांग की है। गीडा प्रशासन द्वारा धुरियापार औद्योगिक गलियारे में जमीन आवंटन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कंपनी के प्रतिनिधियों को प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण भी कराया जा चुका है और वे इस जगह को लेकर काफी उत्साहित हैं।
दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट
कंपनी की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस दवा निर्माण इकाई की स्थापना दो चरणों में की जाएगी। इस चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य और निवेश की प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। दवा निर्माण की इस मुख्य इकाई के अलावा, यहां सहायक गतिविधियों जैसे परिवहन, पैकेजिंग और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला में भी सैकड़ों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
पूर्वांचल का नया इंडस्ट्रियल हब बन रहा धुरियापार
गीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विशाल कुमार के मुताबिक, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश के बड़े और ऐतिहासिक प्रस्ताव मिल रहे हैं। धुरियापार क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम अब अपने अंतिम चरण में है। इस फार्मा कंपनी के अलावा आर्बिट ग्रुप भी यहां स्टील उत्पाद इकाई के लिए ₹400 करोड़ का निवेश करने जा रही है। इससे पहले अदाणी सीमेंट और केयान डिस्टिलरी जैसी बड़ी कंपनियां भी धुरियापार में अपनी जमीन ले चुकी हैं। गीडा में इस दवा फैक्ट्री की स्थापना के बाद गोरखपुर और पूरे पूर्वांचल के युवाओं को नौकरी के लिए पंजाब, मुंबई या दक्षिण भारत के राज्यों की तरफ रुख नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें अपने घर के पास ही विश्वस्तरीय रोजगार मिल सकेगा।
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