गोरखपुर में विकास भवन में गंदगी देख भड़के मंडलायुक्त: डीपीआरओ और डीएसओ समेत कार्यालय प्रभारियों को चेतावनी, एक सप्ताह में व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

विकास भवन का शुक्रवार को मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने निरीक्षण किया। कार्यालयों में गंदगी और सफाई व्यवस्था में कमी मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान कार्यालयों में मिली अव्यवस्थाओं पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यालय प्रभारियों को सफाई व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। कहा कि कार्यालयों में स्वच्छता सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मंडलायुक्त ने डीपीआरओ, जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) सहित संबंधित कार्यालय प्रभारियों को एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था सुधारने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि वह एक सप्ताह बाद फिर निरीक्षण करने आएंगे। उस समय कार्यालयों में गंदगी नहीं मिलनी चाहिए।
मंडलायुक्त के औचक निरीक्षण से विकास भवन के कार्यालयों में साफ-सफाई और कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही का मुद्दा सामने आया। सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने कामकाज और समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कार्यालयों का साफ-सुथरा होना और आमजन को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल निरीक्षण के समय ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से कार्यालयों की सफाई सुनिश्चित कराएं। परिसर और कार्यस्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि दोबारा निरीक्षण के दौरान वही स्थिति देखने को न मिले।
जनसमस्याओं के निस्तारण में तत्परता बरतने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने जनसमस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता और तत्परता बरतने पर भी जोर दिया। उन्होंने डीएसओ कार्यालय में उस महिला का आयुष्मान कार्ड बनवाने के मामले की समीक्षा की, जो पहले मंडलायुक्त कार्यालय में अपनी समस्या लेकर पहुंची थी। महिला को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश पहले ही दिए गए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय की ओर से कार्ड बनवाने की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद मंडलायुक्त ने महिला को आयुष्मान कार्ड सौंपा।
फरियादियों को न लगाना पड़े कार्यालय का चक्कर
इस प्रकरण के माध्यम से मंडलायुक्त ने यह संदेश दिया कि जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का समाधान केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका परिणाम संबंधित व्यक्ति तक पहुंचना भी जरूरी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायत लेकर आने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय से मिले।
छात्रवृत्ति स्वीकृत कराने के निर्देश
समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने छात्रवृत्ति के लिए आने वाली छात्राओं के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पात्र छात्राओं की छात्रवृत्ति तत्काल स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी से छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए संबंधित अधिकारी लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर पात्रता के आधार पर आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराएं। छात्राओं को अपने काम के लिए बार-बार कार्यालय आने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
जिम्मेदारी से काम करने की हिदायत
मंडलायुक्त ने कार्यालयों में मौजूद कर्मचारियों को भी अपने दायित्वों का ईमानदारी और जिम्मेदारी से निर्वहन करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मानजनक व्यवहार और समयबद्ध कार्यवाही का हकदार है। किसी भी आगंतुक को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगात्मक होना चाहिए और लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर नियमानुसार उनका समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यालयों में साफ-सफाई, जनसुनवाई और सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी करें। केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाए कि व्यवस्थाओं में वास्तविक सुधार दिखाई दे। एक सप्ताह बाद होने वाले पुनः निरीक्षण में सफाई व्यवस्था के साथ-साथ दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
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