गोरक्षनाथ घाट पर छज्जा गिरने से दो की मौत: एंबुलेंस में देरी पर हंगामा, अस्पताल के खिलाफ मुकदमे के बाद शांत हुए वकील

गोरखपुर|

शहर में रविवार सुबह राप्ती नदी के गोरक्षनाथ घाट पर गुंबदनुमा छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। इसके नीचे बैठे दो अधिवक्ता मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। आरोप है कि सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद लोगों ने दोनों घायलों को ई-रिक्शा से जिला अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में अधिवक्ता की मौत हो गई, जबकि दूसरे अधिवक्ता ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

हादसा जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर राप्ती नदी किनारे बने गोरक्षनाथ घाट पर सुबह करीब 11:30 बजे हुआ। यहां अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए आठ से अधिक चबूतरे बनाए गए हैं। इन पर गुंबदनुमा छज्जे भी बने हुए हैं। रविवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे आलोक अस्थाना और शक्तिनगर निवासी अधिवक्ता संजय सिंह ऐसे ही एक छज्जे के नीचे बैठे थे। इसी दौरान अचानक छज्जा दोनों के ऊपर आ गिरा। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। लोगों का कहना है कि एंबुलेंस के लिए फोन करने के बावजूद करीब 30 मिनट तक वह मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद दोनों को चादर में रखकर ई-रिक्शा से जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में आलोक की हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। बाद में एंबुलेंस से शव जिला अस्पताल लाया गया। वहीं संजय सिंह ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

चार घंटे तक चलता रहा हंगामा

दोपहर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता जिला अस्पताल पहुंच गए। एंबुलेंस में देरी और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। गुस्साए वकीलों ने एक एंबुलेंस में तोड़फोड़ भी की। एसपी सिटी, सीओ और कई थानों की पुलिस मौके पर मौजूद रही। इसके बावजूद अधिवक्ता करीब चार घंटे तक विरोध करते रहे। आलोक की पत्नी शालिनी अस्थाना की शिकायत पर सीएमओ राजेश झा और जिला अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद अधिवक्ता शांत हुए।

सीएमओ ने दिया आपत्तिजनक जवाब

शालिनी अस्थाना ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि हादसे के बाद दोनों घायलों को जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उनका उचित इलाज नहीं किया। उनका कहना है कि सीएमओ से कई बार संपर्क करने पर उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यहां रोज 10 लोग मरते हैं, एक और मर जाएगा तो क्या हो जाएगा? शालिनी ने आरोप लगाया कि जानबूझकर दवा और इलाज नहीं मिलने से उनके पति की मौत हुई। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

जेई-ठेकेदार पर केस के निर्देश

घटना के बाद डीएम दीपक मीणा ने तत्कालीन जेई और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। दोनों मृत अधिवक्ताओं के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा पांच-पांच लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

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