कानपुर में यूपी एटीएस ने पकड़ा भारत विरोधी साजिश का मास्टरमाइंड: चार लाख फर्जी ईमेल आईडी बनाकर पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों को बेचीं, स्कूलों को मिली धमकियों में हुआ था इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्जी ईमेल आईडी बनाकर देश विरोधी तत्वों को बेचने वाले एक शातिर मास्टरमाइंड अंकित शंखवार (24) को कानपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने वाई-फाई और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल कर करीब चार लाख से अधिक फर्जी ईमेल आईडी तैयार की थीं, जिन्हें उसने पाकिस्तान और बांग्लादेश के भारत विरोधी तत्वों को बेच दिया था। इन ईमेल आईडी का इस्तेमाल दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और अहमदाबाद के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां देने में किया गया था।
एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि 24 वर्षीय आरोपी अंकित शंखवार फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के साइबर अपराधियों और भारत विरोधी तत्वों के सीधे संपर्क में था। उसने ये फर्जी ईमेल आईडी एक बांग्लादेशी नागरिक 'अलामीन इस्लाम' को करीब 6,000 क्रिप्टो करेंसी के बदले बेची थीं। इसके बाद इन ईमेल आईडी को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को ट्रांसफर किया गया, जिन्होंने भारतीय त्योहारों और महत्वपूर्ण आयोजनों से ठीक पहले देश में दहशत फैलाने के लिए धमकी भरे मेल भेजे।
वीआईपी ठिकानों को दी गई थी धमकी
जांच में खुलासा हुआ है कि अंकित द्वारा बनाई गई एक विशिष्ट ईमेल आईडी simenbriones9265@gmail.com का इस्तेमाल देश के कई हिस्सों में दहशत फैलाने के लिए किया गया था। दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के कई प्रतिष्ठित स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी। प्रसिद्ध पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के लाइव शो को निशाना बनाने की चेतावनी और मुंबई के मेयर कार्यालय और अहमदाबाद के 14 स्कूलों व कोर्ट को उड़ाने की धमकी।
लैपटॉप और मोबाइल से खुला पांच लाख आईडी का राज
यूपी एटीएस ने लखनऊ थाने में मामला दर्ज कर आरोपी के पास से एक मोबाइल और एक लैपटॉप बरामद किया है। इस डिवाइस की जांच करने पर पुलिस को दंग करने वाले सबूत मिले हैं, जिसमें लगभग पांच लाख फर्जी ईमेल आईडी का डेटाबेस, विस्तृत एक्सेल शीट्स और क्रिप्टो वॉलेट के लेन-देन के प्रमाण शामिल हैं। एटीएस ने आरोपी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर ले लिया है और केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के अन्य सहयोगियों और भारत में मौजूद मददगारों की तलाश तेज कर दी है।
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