लखनऊ में समान वेतन की मांग को लेकर गरजे डॉक्टर: मनाने के लिए जमीन पर बैठे एसीपी, हाथ जोड़कर की धरना खत्म करने की अपील

उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टरों ने समान वेतन की मांग को लेकर गुरुवार को राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर 1090 चौराहे से मानव श्रृंखला बनाकर सीएम आवास की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। डॉक्टर जब सड़क पर बैठने लगे तो मौके पर मौजूद एसीपी खुद जमीन पर बैठ गए। उन्होंने हाथ जोड़कर डॉक्टरों से धरना खत्म करने की अपील की। पुलिस और डॉक्टरों के बीच काफी देर तक बहस भी होती रही।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बॉन्डेड डॉक्टर शामिल हुए। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर वन बॉंड वन सैलरी और बॉन्डेड मेडिकल अधिकारियों को न्याय दो लिखा था। पुलिस ने डॉक्टरों पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सड़क जाम करने का आरोप लगाया। वहीं, डॉक्टरों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड एमबीएसएस डॉक्टर कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समान डिग्री, बॉन्ड और सेवा की शर्तें होने के बावजूद उन्हें अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है।
बकाया एरियर भुगतान की मांग
डॉक्टरों का दावा है कि समान एमबीबीएस डिग्री, बॉन्ड, काउंसलिंग और चयन प्रक्रिया के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा कर रहे कुछ डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपए प्रतिमाह तक वेतन मिल रहा है। इसे वेतन में असमानता बताते हुए प्रदर्शनकारी समान वेतनमान लागू करने और बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। देवरिया से आईं डॉक्टर निदा ने बताया कि बॉन्ड सेवा के तहत उन्हें दो साल की अनिवार्य सेवा करनी होती है या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता होती है। इस दौरान ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के सीएचसी, पीएचसी समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनाती होती है। इसके बदले उन्हें करीब 50 से 55 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है।
दो सितंबर को डिप्टी सीएम ने किया था मुलाकात
डॉक्टरों का आरोप है कि 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मांगें पूरी करने और 24 घंटे में शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। डॉक्टर पिछले 40 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर अक्षय ने बताया कि वे मिर्जापुर से लखनऊ आए हैं। दूसरे जिले से आकर आंदोलन करना उनके लिए काफी मुश्किल है। करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करके आते हैं लेकिन हर बार निराशा हाथ लगती है। डॉक्टर अक्षय ने कहा, हम डॉक्टर हैं। हमें भगवान कहा जाता है लेकिन वैसा सम्मान नहीं मिलता। अगर हमें सच में भगवान माना जाता तो हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं होता।
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