लखनऊ में कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू: चार साल से वेतन न देने का आरोप, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

राजधानी के ईको गार्डन में गुरुवार को प्रदेशभर की साधन सहकारी समितियों (PACS) के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी मुख्य मांग वेतन का भुगतान सरकारी कोष से करने और बकाया वेतन दिलाने की है। कर्मचारियों का कहना है कि अभी कमीशन के आधार पर मिलने वाली राशि से उनका गुजारा नहीं हो पा रहा है। कई कर्मचारियों का दो से चार साल तक का वेतन बकाया है। मांगें न माने जाने पर उन्होंने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी भी दी है।
साधन सहकारी समिति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह चौहान ने बताया कि पैक्स कर्मचारी लंबे समय से वेतन की समस्या से जूझ रहे हैं। वेतन कमीशन पर आधारित है और समय-समय पर कमीशन बढ़ाने के बजाय उसमें कटौती की गई है जिससे संकट और गहरा गया है। वर्षों तक वेतन न मिलने से कर्मचारियों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने सात सितंबर को आयुक्त एवं निबंधक को ज्ञापन दिया था। 21 सितंबर को अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई लेकिन समाधान नहीं निकला। इसके विरोध में 22 सितंबर को भी धरना दिया गया था। मांगें पूरी न होने पर 7 अक्टूबर को आयुक्त कार्यालय के घेराव का नोटिस दिया गया, जिसके बाद 5 अक्टूबर को फिर बैठक हुई।
मांग पूरी होने तक प्रदर्शन की चेतावनी
कर्मचारी नेता के मुताबिक सहकारिता मंत्री से मुलाकात में भी वेतन भुगतान की व्यवस्था का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। एक करोड़ से ज्यादा किसान जुड़े हैं। पैक्स कर्मचारियों का दावा है कि प्रदेश में करीब एक करोड़ 9 लाख किसान उनसे सीधे जुड़े हैं। समितियों के जरिए किसानों को खाद-बीज देने के साथ धान और गेहूं की खरीद का काम भी किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उनके वेतन की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। कर्मचारी नेताओं ने साफ किया कि जब तक वेतन की स्थायी व्यवस्था नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार ने मांगें नहीं मानी तो प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देंगे।
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