लखनऊ में विवेक तिवारी हत्याकांड में फैसला: दोषी सिपाही को 10 साल की सजा, सबूतों के अभाव में दूसरा आरोपी रिहा
लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में दोषी पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को 10 साल की सजा सुनाई गई है। लखनऊ की जिला एवं सत्र अदालत ने 17 सितंबर को प्रशांत को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था। 21 सितंबर को सजा के ऐलान के दौरान विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके साले कोर्ट में मौजूद नहीं थे। मामले में दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया जा चुका है। करीब आठ साल से चल रहे इस केस में अंतिम बहस छह अगस्त को पूरी हुई थी।
दोषसिद्धि के बाद विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना ने अदालत के फैसले पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें कोर्ट से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन फैसला उनकी अपेक्षा के मुताबिक नहीं आया। कल्पना ने प्रशांत को प्रशिक्षित पुलिसकर्मी बताते हुए सवाल उठाया था कि गोली चलाने की घटना को महज गलती कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा था कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगी।
कार रोकने के दौरान चली थी गोली
29 सितंबर 2018 की देर रात एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ कार से लौट रहे थे। गोमतीनगर विस्तार के मकदूमपुर इलाके में बाइक सवार पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, कार नहीं रुकी और टक्कर की स्थिति बनी। इसी दौरान प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी। गोली लगने के बाद विवेक को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसी मामले में अदालत ने प्रशांत को गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना और अब 10 साल की सजा सुनाई है।











