आरक्षण को लेकर महासंग्राम: 68,500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, लखनऊ में SCERT कार्यालय घेरा
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 से लंबित 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर गरमा गया है। नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 70 दिनों से लगातार अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने बुधवार को लखनऊ के निशातगंज स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) कार्यालय का घेराव किया। आठ साल से रोजगार की राह देख रहे हैं पीड़ित अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कार्यालय परिसर में ही जमीन पर बैठकर प्रदेश सरकार और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आरक्षण में धांधली का आरोप
आंदोलनकारियों का दावा है कि 2018 में शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। आरक्षण नियमों की अनदेखी और गड़बड़ी की गई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग दोनों ही इस भर्ती में आरक्षण की विसंगतियों को स्वीकार कर चुके हैं। और इन्हें सुधारने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद विभाग इन आदेशों को लागू करने में आनाकानी कर रहा है।
आठ साल का लंबा इंतजार
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा और आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के 8 साल बाद भी कुछ नहीं हुआ। वे मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। जबकि आयोग इस भर्ती में आरक्षण की विसंगतियों को स्वीकार कर चुके हैं। उसके बावजूद आरक्षण नियमों की अनदेखी और गड़बड़ी की गई है।
मंत्रियों से मुलाकात के बाद भी नतीजा शून्य
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नवीन नामक अभ्यर्थी ने एक सच्चाई बताई है। बीते 10 सितंबर को उनकी मुलाकात बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के साथ हुई थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। नवीन का दावा है कि इस बैठक के दौरान खुद मंत्रियों और अधिकारियों ने भर्ती में तकनीकी व आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों की बात स्वीकार की थी। अभ्यर्थी मुख्यमंत्री, विभिन्न विधायकों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को भी अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके हैं। लेकिन आश्वासनों के अलावा अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
एक अन्य प्रदर्शनकारी तूफान सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। राष्ट्रीय और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी उन्हें नियुक्ति न देना उनके अधिकारों का हनन है। अभ्यर्थियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि आयोग के आदेशों का पालन करते हुए आरक्षण की विसंगतियों को पूरी तरह दूर किया जाए। और उन्हें ज्वाइनिंग लेटर दिया जाए। जब तक नहीं मिलेगा तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
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