यूपी में स्मार्ट पुलिसिंग: मुख्यमंत्री ने कहा-सभी 75 जिलों में साइबर थाने सक्रिय, हर मंडल में फॉरेंसिक लैब बनाने की ओर बढ़े कदम

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बड़े बदलाव किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में 'टेकसंगम 2026' कार्यक्रम के दौरान राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थानों की स्थापना का कार्य पूरा हो चुका है और अब राज्य सरकार हर प्रशासनिक मंडल में आधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और जांच प्रणाली में आए इस तकनीकी बदलाव को आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया। वर्ष 2017 से पहले पूरे प्रदेश के 24 करोड़ नागरिकों के लिए केवल दो साइबर थाने मौजूद थे। आज राज्य के सभी 75 जनपदों में एक-एक साइबर क्राइम थाना सक्रिय है। इसके साथ ही आम जनता की सुविधा के लिए प्रत्येक स्थानीय पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क भी बनाई गई है। राज्य में पहले केवल चार फॉरेंसिक साइंस लैब थीं, जिनकी संख्या बढ़ाकर अब 12 की जा चुकी है। वर्तमान में सरकार का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक मंडल में फॉरेंसिक लैब स्थापित करना है। प्रदेश में वैज्ञानिक साक्ष्यों के विश्लेषण के लिए यूपी स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट का गठन किया जा चुका है। इसके अलावा, साक्ष्य संकलन को गति देने के लिए हर जनपद में मोबाइल फॉरेंसिक वैन भी उपलब्ध कराई गई हैं।
कन्विक्शन रेट में भारी बढ़ोतरी
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि 2017 से पहले वैज्ञानिक जांच और तकनीकी संसाधनों की भारी कमी थी। साक्ष्यों के अभाव में अपराधी आसानी से बच निकलते थे और तब राज्य का कन्विक्शन रेट 30% से भी कम था। लेकिन आज डिजिटल इंटेलिजेंस, एआई (AI), डेटा प्रोटेक्शन और मजबूत फॉरेंसिक नेटवर्क के चलते अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है और कन्विक्शन रेट में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फिलहाल और खबरें उपलब्ध नहीं हैं।

