यूपी एमएलसी चुनाव में सपा ने बढ़ाई ताकत: अखिलेश की रणनीति रही कारगर, दो सीटों पर जीत के साथ तीन पर बनाई बढ़त

उत्तर प्रदेश में 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए हुए एमएलसी चुनाव के मतगणना रुझानों और नतीजों से समाजवादी पार्टी के खेमे में भारी उत्साह है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की खास रणनीति इस चुनाव में बेहद कारगर साबित होती दिख रही है। ताजा जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने दो महत्वपूर्ण सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर ली है, जबकि तीन अन्य सीटों पर लगातार बढ़त बनाए हुए है। इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बड़ा उलटफेर करते हुए सपा के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया। आगरा में भी अखिलेश यादव की रणनीति पूरी तरह सफल रही। यहां से सपा समर्थित प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने कड़ी टक्कर के बीच विजय पताका फहराई है।
तीन सीटों पर सपा की मजबूत बढ़त
शुरुआती मतगणना के बाद से ही समाजवादी पार्टी तीन अन्य प्रमुख स्नातक सीटों पर अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे चल रही है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के मानसिंह यादव अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से भारी अंतर से आगे चल रहे हैं। वहीं वाराणसी स्नातक सीट पर शिक्षक सीट जीतने के बाद स्नातक सीट पर भी सपा उम्मीदवार ने मजबूत पकड़ बनाई हुई है और लखनऊ स्नातक सीट पर भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।
अखिलेश यादव का बयान: "हम आएंगे"
शानदार प्रदर्शन और जीत से उत्साहित सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पार्टी के विजयी नेताओं और कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए बड़ा वादा किया और कहा-"हम आएंगे"। अखिलेश ने इसे जनता और प्रबुद्ध वर्ग का भाजपा की नीतियों के खिलाफ जनादेश बताया है। हालांकि, कुछ सीटों पर उन्होंने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए सत्तापक्ष पर निशाना भी साधा।
सपा का कमबैक
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा और नेता प्रतिपक्ष का पद बचाए रखने के लिए सपा को इस चुनाव में कम से कम तीन सीटें जीतना बेहद जरुरी था। वर्तमान प्रदर्शन को देखते हुए सपा न सिर्फ अपनी साख बचाने में कामयाब रही है, बल्कि उसने सदन में अपनी ताकत को भी पहले से अधिक मजबूत कर लिया है। इसे उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के एक बड़े 'कमबैक' के तौर पर देखा जा रहा है।
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