मऊ में बकरे की लाश जलाकर खुद को घोषित किया मृत: एआई से बनाई चिता की फोटो, 18 महीने बाद पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

जिले में हत्या के मुकदमे में उम्रकैद की आशंका से बचने के लिए एक आरोपी ने अपनी मौत की झूठी कहानी रच दी। पुलिस के मुताबिक, राजू उर्फ राजकुमार राजभर ने बकरे की लाश जलवाकर खुद के अंतिम संस्कार का नाटक किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से चिता पर लेटे होने की फर्जी तस्वीर तैयार कराई। परिवार ने उसकी तेरहवीं भी कर दी। आरोपी ने कथित तौर पर श्मशान घाट और नगर पालिका से मृत्यु से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर अदालत में जमा किए और फरार हो गया। करीब 18 महीने तक साधु का भेष धारण कर ठिकाने बदलता रहा। रविवार सुबह करीब नौ बजे पुलिस ने उसे ख्वाजाजहांपुर गांव से अरेस्ट कर लिया। राजू वर्ष 2016 में भट्ठा मालिक योगेश सिंह की हत्या के मामले में वांछित था।
पुलिस के अनुसार, कोतवाली नगर क्षेत्र के ख्वाजाजहांपुर निवासी 38 वर्षीय राजकुमार राजभर और उसके मित्र सुदर्शन राजभर ने भट्ठा मालिक योगेश सिंह से ईंटें खरीदी थीं। रुपये मांगने को लेकर विवाद हुआ। 19 दिसंबर 2016 को मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के भतीजे अविनाश सिंह की शिकायत पर राजकुमार और सुदर्शन के खिलाफ केस दर्ज हुआ। मामले में अदालत में सुनवाई चल रही थी। पुलिस का कहना है कि सजा की आशंका के चलते राजकुमार ने खुद को मृत साबित करने की साजिश रची। उसने 30 मई 2025 को गाजीपुर में कथित तौर पर अपनी मौत का फर्जी रिकॉर्ड तैयार कराया।
मृत्यु प्रमाण पत्र अदालत में जमा करने का आरोप
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के मुताबिक, आरोपी पहले मुंबई में काम करता था। बाद में शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार से जुड़ गया। पुलिस के अनुसार, उसे कथित तौर पर बेहोश करके अस्पताल ले जाने और तस्वीरों में बदलाव कर अंतिम संस्कार का दृश्य तैयार करने की कहानी बनाई गई। इसके बाद बकरे की लाश जलवाई गई, ताकि लोगों को उसकी मौत पर संदेह न हो। आरोपी ने मृत्यु और दाह संस्कार से संबंधित दस्तावेज बनवाए। 11 जून को तेरहवीं का कार्ड भी छपवाया गया। आरोप है कि नगर पालिका से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल किया गया। इन्हें अदालत में जमा करने के बाद वह गायब हो गया।
करीब 10 लाख रुपये की बीमा की राशि मिलने की सूचना
पुलिस के मुताबिक, राजकुमार की पत्नी को उसकी मौत की जानकारी दी गई थी। इसके बाद परिवार ने तेरहवीं कर दी। जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि पत्नी को करीब 10 लाख रुपये की बीमा राशि मिली थी। अब यह पता लगाया जा रहा है कि भुगतान किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसमें मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया। फिलहाल बीमा में गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। आरोपी के परिवार में पत्नी, चार बच्चे और बुजुर्ग मां हैं। वह राजमिस्त्री का काम भी करता था। पुलिस के अनुसार, वह लोगों से रकम लेकर शेयर बाजार में निवेश करने का दावा करता था।
निवेशकों के पैसे से जुड़े पहलुओं की पड़ताल
पुलिस के अनुसार, आरोपी के ट्रेडिंग कारोबार में कई लोगों ने रकम लगाई थी। इनमें दो होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल थे। राजकुमार के कथित बयान के मुताबिक, डॉक्टरों ने उसे मृत दिखाने की सलाह दी थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या हत्या के मुकदमे से बचने के अलावा निवेशकों की रकम लौटाने से बचना भी साजिश का मकसद था। दोनों डॉक्टरों की भूमिका की अभी जांच की जा रही है। उनसे पूछताछ की जाएगी।
साधु बनकर बदलता रहा ठिकाने
अपर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, सिविल लाइंस पुलिस टीम आरोपी की तलाश में जुटी थी। वह करीब 18 महीने से ठिकाने बदलकर रह रहा था। ख्वाजाजहांपुर गांव में मौजूदगी की सूचना मिलने पर पुलिस ने दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया। अब फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, तस्वीरों में कथित छेड़छाड़ और साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जिसकी संलिप्तता सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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