आज़म खान की मुश्किलें बढ़ीं: जेल से रिहा होते ही गिरफ्तार, अवैध कब्जा मामले में कसेगा शिकंजा
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आज़म खान की कानूनी मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में दोहरे पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने और जेल से रिहा होते ही ED ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में फिर से हिरासत में ले लिया। अब ED उनके खिलाफ 'शत्रु संपत्ति' पर अवैध कब्जे के गंभीर मामले में भी शिकंजा कसने की तैयारी में है। जांच एजेंसी आगामी त्योहारों (दीपावली) के तुरंत बाद आज़म खान को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। पूछताछ के बाद एक व्यापक आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जाएगा।
क्या है शत्रु संपत्ति का मामला?
आज़म खान पर आरोप है कि उन्होंने रामपुर के ग्राम सिंगनखेड़ा में स्थित करीब 34 एकड़ 'शत्रु संपत्ति' जमीन पर कब्जा किया। यह जमीन 45 अलग-अलग भूखंडों में फैली हुई है। पट्टा रद्द होने के बाद भी कब्जा किया गया। कस्टोडियन विभाग द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पक्ष में किया गया भूमि का पट्टा रद्द किए जाने के बावजूद इस जमीन का उपयोग विश्वविद्यालय परिसर के लिए जारी रखा। मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए ED पहले ही रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर चुकी है। जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ट्रस्ट में मिलाई गई सरकारी जमीन
प्रवर्तन निदेशालय के जांच अधिकारी इस वित्तीय और कानूनी हेरफेर की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं। आखिर रामपुर के सिंगनखेड़ा गांव में स्थित 34 एकड़ शत्रु संपत्ति को मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट में कैसे मिला लिया गया। जांच में यह सामने आया है कि 'कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी' द्वारा इस जमीन के पट्टे को रद्द किए जाने के बावजूद, आजम खां के नियंत्रण वाले ट्रस्ट ने इस पर अवैध कब्जा जारी रखा। और इसका इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर के विस्तार के लिए किया। ED अब रिमांड के दौरान उन सरकारी दस्तावेजों और मिलीभगत की पड़ताल करेगी। जिसके जरिए इस संवेदनशील सरकारी भूमि का स्वरूप बदला गया।
LAD फंड का दुरुपयोग
जांच एजेंसी के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि आजम खां ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल किया। सार्वजनिक धन को निजी हित में डाइवर्ट किया। उत्तर प्रदेश जल निगम के अध्यक्ष और नगर विकास मंत्री रहते उन्होंने सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग किया। उनकी देखरेख में, विधायकों और विधान पार्षदों की स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से लगभग 6.60 करोड़ रुपये की राशि जारी कराई। कायदे से इस धन का उपयोग जनहित के कार्यों में होना था। लेकिन इसे सीधे तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी के निजी परिसर के भीतर निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया गया। ED इस बात की कड़ियों को जोड़ रही है कि कैसे एक सरकारी विभाग (जल निगम) ने एक निजी ट्रस्ट के लिए ठेकेदारों के माध्यम से बुनियादी ढांचे का निर्माण किया।
सरकारी ठेकेदारों से पैसों की री-रूटिंग
ED की तफ्तीश में मनी लॉन्ड्रिंग का एक बेहद शातिर पैटर्न सामने आया है। जिसे 'फर्जी डोनेशन नेटवर्क' कहा जा रहा है। रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में जिन ठेकेदारों को लोक निर्माण विभाग (PWD) या अन्य विभागों को मजबूर किया। करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडर का एक बड़ा हिस्सा जौहर ट्रस्ट को 'दान' (Donations) के रूप में वापस लौटाएं। उदाहरण के लिए, एक बड़े ठेकेदार ने स्वीकार किया है कि उसे मिले 186 करोड़ रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा सीधे यूनिवर्सिटी की खरीद पर खर्च करवाया गया। रामपुर नगर पालिका द्वारा खरीदी गई सफाई और रोड-क्लीनिंग मशीनों को भी अवैध रूप से यूनिवर्सिटी कैंपस में ट्रांसफर कर दिया था। जांच एजेंसी इन सभी ठेकेदारों के बयानों और बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन के जरिए आजम खां को घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक भविष्य पर संकट
दीपावली के ठीक बाद ED की सैकड़ों तीखे सवालों की यह फेहरिस्त आजम खां के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाली है। वित्तीय विसंगतियों के कारण जांच एजेंसी पहले ही जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है। जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है। 13 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई नई एफआईआर के कारण आजम खां की न्यायिक हिरासत की मियाद को काफी लंबा खींच सकती है। कानूनी मोर्चे पर बढ़ते इन पुख्ता सबूतों के चलते उनकी जेल से रिहाई की राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है।
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