बदायूं के पूर्व विधायक कुशाग्र ने भाजपा से तोड़ा नाता: उपेक्षा पर जताई नाराजगी, कई पन्नों में विस्तार से लिखी शिकायतें

उत्तरप्रदेश|
उपेक्षा पर जताई नाराजगी, कई पन्नों में विस्तार से लिखी शिकायतें

बदायूं जिले के भाजपा के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने उपेक्षा पर नाराजगी जताते हुए इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आठ पन्नों में विस्तार से अपना दर्द लिखा है। उनके इस्तीफे से भाजपा में हलचल मच गया है। वह 2017 के चुनाव में भाजपा की जीत का चेहरा बने थे। उनके इस्तीफे में टिकट, चुनाव और पद से ज्यादा सम्मान, उपेक्षा और संगठन में अपनी जगह को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है।

बुधवार को बिसौली के एक बरातघर में समर्थकों के साथ उन्होंने बैठक की। इसके बाद कुशाग्र सागर ने भाजपा की प्राथमिक एवं सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उनके सपा में जाने की चर्चा है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को संबोधित लिखित त्यागपत्र में अपने राजनीतिक सफर और पार्टी से शिकायतों का विस्तार से जिक्र किया है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके राजनीतिक विरोधी विधायक आशुतोष मौर्य को अपने साथ मिला लिया है, जबकि उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने वर्तमान विधायक की पत्नी और बहन को पार्टी की सदस्यता दिलाने का भी उल्लेख किया।

मंचों पर अपमानित करने का भी आरोप

पूर्व विधायक ने तत्कालीन क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य पर अपने विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रमों की जानकारी नहीं देने और राजनीतिक मंचों पर अपमानित करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश स्तर पर शिकायतों से अवगत कराने के बावजूद उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।

इस्तीफे में कुशाग्र सागर ने 2017 के विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने करीब 24 साल बाद बिसौली सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने एक लाख से अधिक मत मिलने और 2022 में हार के बाद भी संगठन के लिए सक्रिय रहने का दावा किया। लोकसभा चुनावों में प्रचार, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और पार्टी का जनाधार बढ़ाने में योगदान देने की बात भी लिखी है।

अगले राजनीतिक कदम पर टिकीं सबकी निगाहें

सागर ने लिखा है कि वह राजनीति में धन कमाने या बड़े पद की महत्वाकांक्षा लेकर नहीं आए थे। उनका उद्देश्य सम्मान के साथ जनता की सेवा करना था, लेकिन लगातार उपेक्षा से उन्हें दुख पहुंचा है। ऐसी परिस्थितियों में भाजपा के साथ बने रहना मुश्किल बताते हुए इस्तीफा देने की घोषणा की। पूर्व विधायक के फैसले के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर निगाहें हैं।

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