मुरादाबाद में पकड़ा गया एक और तेंदुआ: अभियान के तहत लगाया गया था पिंजरा, अब तक चार लोगों की ली जान
मुरादाबाद जिले में तेंदुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। इसी दौरान वन विभाग को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। डिलारी थाना क्षेत्र के सजनी जलालपुर गांव में लगाए गए पिंजरे में एक और खतरनाक तेंदुआ कैद हो गया है। इसके साथ ही तीन अगस्त से अब तक जिले में पकड़े गए तेंदुओं की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इस आदमखोर के पिंजरे में फंसने के बाद से स्थानीय ग्रामीणों ने फिलहाल राहत की सांस ली है, लेकिन पूरे इलाके में अभी भी दहशत और डर का माहौल पूरी तरह बना हुआ है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ठाकुरद्वारा तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार तेंदुओं की संदिग्ध गतिविधियां सामने आ रही थीं, जिसके बाद रेस्क्यू अभियान को काफी तेज कर दिया गया था। इसी अभियान के तहत सजनी जलालपुर गांव में पिंजरा लगाया गया था जिसमें यह तेंदुआ फंस गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और तेंदुए को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। पिछले एक महीने से अधिक समय से चल रहे इस अभियान के तहत अब तक अकेले ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र से 12 तेंदुए और कांठ क्षेत्र से एक तेंदुआ पकड़ा जा चुका है।
वन विभाग ने बढ़ाई पिंजरों की संख्या
जिले के आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुओं के लगातार पहुंचने और हमलों की घटनाओं से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। इन हमलों में अब तक महिलाओं समेत चार लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इसके अलावा सड़क हादसों में भी दो तेंदुओं की मौत के मामले सामने आ चुके हैं, जिनके शव ठाकुरद्वारा और छजलैट थाना क्षेत्र में सड़क किनारे मिले थे। इन बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने जिलेभर में पिंजरों की संख्या बढ़ाकर अब 46 कर दी है, ताकि जल्द से जल्द सभी तेंदुओं को दबोचा जा सके।
वन विभाग की टीमें लगातार कर रही निगरानी
संवेदनशील गांवों में वन विभाग की टीमें लगातार गश्त और निगरानी कर रही हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले खेतों या जंगलों की तरफ बिल्कुल न जाएं, बच्चों पर विशेष नजर रखें और कहीं भी तेंदुआ दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें। अधिकारियों का साफ कहना है कि जब तक तेंदुओं की आवाजाही पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो जाती, तब तक यह रेस्क्यू अभियान लगातार जारी रहेगा।











