बागपत के मंदिर परिसर में दफन मिले दो दोस्तों के शव: 19 दिन से लापता थे दोनों, हत्या के आरोप में दोनों शिष्य गिरफ्तार
चांदीनगर थाना क्षेत्र में 19 दिन से लापता दो दोस्तों के शव एक गणेश मंदिर परिसर में जमीन के अंदर दफन मिले। पुलिस ने महंत नरेश नाथ पर दोनों युवकों की हत्या कर शव मंदिर के पीछे दफनाने का आरोप लगाया है। पुलिस के पहुंचने से पहले ही महंत फरार हो गया। उसके दो शिष्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने शवों को मंदिर परिसर में दफन किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस लहचौड़ा स्थित गणेश मंदिर पहुंची और शिष्यों की निशानदेही पर खोदाई कर दोनों शव बरामद किए। शव काफी सड़ चुके थे। कपड़ों, अंकित की दिव्यांगता और इसरार की घड़ी के आधार पर दोनों की पहचान की गई। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाकर मौके से साक्ष्य जुटाए और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए बागपत जिला अस्पताल भेज दिया गया। महंत की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हैं।
सिगोली तगा निवासी इसरार मजदूरी करता था। वहीं, दिव्यांग अंकित बेरोजगार था। दोनों पुराने दोस्त थे और उनके घर आमने-सामने हैं। इसरार के पिता रिड़कू ने बताया कि 25 जुलाई की दोपहर दोनों बाइक से घूमने निकले थे, लेकिन अगले दिन तक वापस नहीं लौटे। परिवार ने उनकी तलाश शुरू की, मगर कोई जानकारी नहीं मिली। 27 जुलाई की शाम से दोनों के मोबाइल नंबर भी बंद आने लगे। इसके बाद 29 जुलाई को चांदीनगर थाने में दोनों की गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पुलिस ने मोबाइल नंबरों, संभावित ठिकानों और अन्य माध्यमों से उनकी तलाश शुरू की थी।
बहन से संबंध को लेकर महंत से विवाद का आरोप
मृतक इसरार के भाई फरीद ने आरोप लगाया कि अंकित की बहन का लहचौड़ा स्थित गणेश मंदिर के महंत नरेश नाथ से संबंध था। परिवार के लोग दोनों को कई बार समझा चुके थे, लेकिन महंत के रवैये में बदलाव नहीं आया। फरीद के मुताबिक, 25 जुलाई को अंकित और इसरार ने रटौल जाने की बात कहकर घर से निकलने की बात कही थी। परिवार का अनुमान है कि दोनों महंत को समझाने और धमकाने के इरादे से मंदिर गए होंगे। इसके बाद उनके साथ क्या हुआ? इसकी जानकारी परिवार को नहीं है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में इसी विवाद को हत्या की वजह के तौर पर देखा जा रहा है।
शिष्यों से पूछताछ में सामने आया शव दफनाने का राज
पुलिस को बुधवार रात मुखबिर से सूचना मिली कि दोनों युवकों की हत्या में गणेश मंदिर के महंत नरेश नाथ की भूमिका है। पुलिस पूछताछ के लिए मंदिर पहुंची, लेकिन महंत वहां नहीं मिला। इसके बाद उसके दो शिष्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने मंदिर परिसर में शव दफनाए जाने की जानकारी दी। रात करीब तीन बजे पुलिस टीम ने दोबारा मंदिर पहुंचकर खोदाई कराई। मंदिर के पिछले हिस्से में जमीन के अंदर दोनों शव बरामद हुए। मौके पर फॉरेंसिक टीम ने जांच कर साक्ष्य जुटाए। दोनों शिष्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पहले गाजियाबाद में शव मिलने की सूचना से मचा था हड़कंप
फरीद ने बताया कि सोमवार को गाजियाबाद में एक शव मिलने की सूचना पर परिवार के लोग उसकी पहचान करने पहुंचे थे। हालांकि, वह शव किसी और का निकला। इसके बाद पुलिस ने इसरार की हत्या की सूचना परिवार को दी। मंदिर परिसर से शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। ग्रामीणों के अनुसार, लहचौड़ा का गणेश मंदिर जिले का इकलौता गणेश मंदिर है। करीब 500 गज क्षेत्र में बने इस मंदिर में गणेश चतुर्थी और दीपावली पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
उत्तराखंड का रहने वाला है फरार महंत
इसरार के भाई फरीद के अनुसार, महंत नरेश नाथ मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला है। करीब छह महीने पहले तक वह सिगोली तगा गांव में अंकित के पड़ोस में किराए के मकान में रहता था। अंकित की बहन से संबंध की बात सामने आने के बाद विवाद हुआ और इसके बाद महंत अपने शिष्यों के साथ मंदिर परिसर में रहने लगा। चांदीनगर थाना प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि दोनों युवकों के शव मंदिर परिसर से बरामद किए गए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का तरीका स्पष्ट होगा। महंत फरार है और उसके दो शिष्यों से पूछताछ की जा रही है। मंदिर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस महंत की तलाश में जुटी है।
इसरार के पीछे पत्नी और तीन बच्चे
परिजनों के मुताबिक, इसरार मजदूरी कर परिवार चलाता था। उसके परिवार में पत्नी फिरदौस और तीन बच्चे हैं। बेटी इसरा छह साल की है, जबकि बेटे आयान की उम्र पांच साल और फैजान की तीन साल है। उसकी मौत के बाद परिवार में मातम पसरा है। वहीं अंकित पांच बहनों का इकलौता भाई था। वह अविवाहित और बेरोजगार था। उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है।











