प्रतापगढ़ में 100 साल पुराना मकान ढहा: मलबे में दबा पूरा परिवार, 6 लोगों की मौत
जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। महुली मोहल्ले में करीब 100 साल पुराना मकान भरभराकर गिर गया। हादसे के समय परिवार के सात सदस्य एक कमरे में सो रहे थे। छत गिरने से माता-पिता, बेटा, बहू और दो मासूम बच्चों की मलबे में दबकर मौत हो गई। परिवार का केवल एक सदस्य जीवित बचा, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। रात के सन्नाटे में हुए इस हादसे में किसी को संभलने या मदद के लिए आवाज लगाने तक का मौका नहीं मिला।
जानकारी के अनुसार, गर्मी और उमस अधिक होने के कारण परिवार के सातों सदस्य एयर कंडीशनर वाले कमरे में सो रहे थे। रात करीब दो बजे अचानक मकान की छत भरभराकर गिर गई। कुछ ही सेकेंड में पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया और सभी लोग उसके नीचे दब गए। कमरे के किनारे सो रहा बड़ा बेटा अमन किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा। उसके शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस तथा दमकल विभाग को सूचना दी। करीब दो घंटे तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद सभी को मलबे से बाहर निकाला गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया।

माता-पिता, बेटा, बहू और दो मासूमों की गई जान
पुलिस के मुताबिक, हादसे में मकान मालिक प्रमोद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी रीता, छोटे बेटे नितिन, बड़ी बहू माधुरी और माधुरी के दो बेटे माधव और अद्विक की मौत हो गई। परिवार के बड़े बेटे अमन को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे के बाद पूरे मोहल्ले में मातम का माहौल है।

पहली मंजिल का निर्माण था अधूरा
प्रमोद श्रीवास्तव दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई पवन अलग मकान में रहते हैं और प्रतापगढ़ कचहरी परिसर में चाय की दुकान संचालित करते हैं। प्रमोद अपने पुश्तैनी मकान में परिवार के साथ रहते थे और रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी पत्नी गृहिणी थीं। कुछ समय पहले दोनों भाइयों ने अपनी पैतृक जमीन करीब 75 लाख रुपये में बेची थी। लगभग 1300 वर्गफीट में बने इस मकान में दो कमरे, रसोई, शौचालय और स्नानघर था। तीन वर्ष पहले पहली मंजिल की दीवारें खड़ी की गई थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उस पर लिंटर नहीं डल सका था। परिवार जल्द ही निर्माण कार्य पूरा कराने की तैयारी कर रहा था। छोटे बेटे नितिन का विवाह अभी नहीं हुआ था।

लोहे की रॉड से खिड़की तोड़कर घुसी पुलिस
हादसे में जीवित बचे अमन श्रीवास्तव ने बताया कि रात करीब साढ़े दस बजे पूरा परिवार भोजन करने के बाद सो गया था। कमरे में वह, उनकी पत्नी, दोनों छोटे बेटे, माता-पिता और छोटा भाई मौजूद थे। रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच अचानक तेज धमाके जैसी आवाज आई। आंख खुलते ही चारों ओर मलबा दिखाई दिया और उनका शरीर भी उसमें दबा हुआ था। किसी तरह बाहर निकलने के बाद उन्होंने देखा कि परिवार के बाकी सभी सदस्य मलबे के नीचे दबे हैं। उन्होंने अकेले उन्हें निकालने की कोशिश की। लेकिन भारी मलबे के कारण सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने जोर-जोर से आवाज लगाकर आसपास के लोगों को बुलाया। स्थानीय लोगों, पुलिस और फायर टीम ने संयुक्त रूप से राहत अभियान चलाया। पुलिसकर्मियों ने लोहे की रॉड से खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया और एक-एक कर सभी को बाहर निकाला। लेकिन तब तक छह लोगों की जान जा चुकी थी।



