यूपी में एचआईवी का खौफनाक विस्फोट: 10 महीने में 900 नए मरीज, आधे से अधिक किशोर और युवा

वाराणसी|
10 महीने में 900 नए मरीज, आधे से अधिक किशोर और युवा

उत्तर प्रदेश से स्वास्थ्य क्षेत्र को झकझोर देने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्य में पिछले 10 महीनों के भीतर 900 नए एचआईवी पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं। सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि इन संक्रमितों में आधे से अधिक संख्या किशोरों और युवाओं की है। संक्रमण की इस रफ्तार के बीच अब तक दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों के लिए यह आंकड़ा एक बड़े खतरे की घंटी है, जिसने युवाओं की जीवनशैली और नशे की लत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाराणसी के प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अस्पताल में जांच कराने वाले 728 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें से 150 से अधिक संक्रमित अकेले वाराणसी जिले के हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तेजी से मामले सामने आ रहे हैं।

संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजह-ड्रग्स और इन्फेक्टेड सुई

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शुरुआती जांच में जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला कारण सामने आया है, वह है नशे के लिए एक ही सिरिंज का इस्तेमाल करना। युवा और किशोर नशा करने के लिए एक-दूसरे की इस्तेमाल की हुई सिरिंज साझा कर रहे हैं, जिससे वायरस बेहद तेजी से एक से दूसरे शरीर में फैल रहा है। संक्रमण फैलने के पीछे दूसरा बड़ा कारण असुरक्षित शारीरिक संबंध होना माना जा रहा है। आजकल के युवाओं में टैटू का क्रेज बहुत ज्यादा है। एक ही संक्रमित सुई से कई लोगों के शरीर पर टैटू बनाने की वजह से भी अनजाने में लोग इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।

दो चचेरे भाइयों की मौत से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बिजनौर इलाके में इस संक्रमण के चलते दो सगे चचेरे भाइयों की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि इलाके में किराए पर रह रही एक संक्रमित महिला के संपर्क में आने से यह वायरस फैला, जिसने इन दोनों युवकों की जान ले ली। इस घटना के बाद से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ मामले की छानबीन और मौतों के सटीक कारणों की कड़ियों को जोड़ने में जुटा हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जांच का दायरा बढ़ा

इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर काउंसिलिंग, टेस्टिंग और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि संक्रमण की इस चेन को समय रहते तोड़ा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी अब लाइलाज या तुरंत मौत का कारण बनने वाली बीमारी नहीं रह गई है, अगर समय पर एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी शुरू कर दी जाए, तो संक्रमित व्यक्ति भी एक सामान्य और लंबा जीवन जी सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि युवा नशे की लत से दूर रहें और किसी भी सूरत में उपयोग की गई सुइयों का इस्तेमाल न करें।

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