बस्तर में पीएम मोदी ने जवानों के साथ दिवाली मनाई: बोले- नकली नोटों के नेटवर्क के ध्वस्त होते ही खत्म हुआ नक्सलवाद, जीती दशकों पुरानी लड़ाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली के दिन रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में सुरक्षा बलों के जवानों से मुलाकात की। इस दौरान जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद पर जीत के बाद यह पहली दिवाली है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश का हर जवान मेरे परिवार का हिस्सा है। पीएम मोदी लगातार 13वीं बार जवानों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे थे। इससे पहले 12 मौकों पर उन्होंने देश के अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। सबसे ज्यादा तीन बार जम्मू-कश्मीर गए। दो-दो बार हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जा चुके हैं।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
बस्तर में प्रधानमंत्री ने जवानों से कहा कि 2026 की दिवाली विशेष है, क्योंकि देश नक्सलवाद के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई जीत चुका है। उन्होंने कहा कि यह देश की पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद मे मुक्त है। उन्होंने कहा कि यह असाधरण उपब्लधि है, इसका श्रेय आपको जाता है। इसके बाद पीएम ने करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस का दौरा किया। यह बेस बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्च पैड के रूप में काम करता था।
आपके बीच दिवाली मनाने आया हूं : पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि आज, पूरे देश में और दुनिया के हर कोने में, करोड़ों भारतीय रोशनी का यह पावन पर्व मना रहे हैं। लोग अपने घरों को लौटने के लिए दूर-दूर से यात्रा कर रहे हैं। परिवारों और अपनों के एक साथ मिलकर जश्न मनाने का यह एक बहुत अच्छा अवसर है। मैं भी दिवाली मनाने के लिए आप लोगों के बीच आया हूं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''जो लोग सीमाओं पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा करते हैं, जो देश के रक्षक हैं और भारत माता के वीर बेटे-बेटियां हैं, आप सभी मेरे परिवार के सदस्य हैं। 140 करोड़ देशवासियों की ओर से आपके त्याग और समर्पण का आभार व्यक्त करने आया हूं।''
बस्तर में शुरू हुई विकास की नई लहर
पीएम मोदी ने कहा, ''आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं। इस बार, मैं बस्तर के जंगलों में दिवाली मनाने आया हूं। यह वह जगह है जहां कभी नक्सलवाद का खतरा हुआ करता था। लेकिन, आपके बलिदान और समर्पण की बदौलत, अब इसी इलाके से नक्सलवाद का खतरा खत्म हो गया है और विकास की एक नई लहर शुरू हो गई है।''
उन्होंने कहा, "हमारे दूरदर्शी पूर्वजों ने कहा है, " अभ्यंतर भयं रक्षम्,असारंबाह्यतो भयं" अर्थात जब राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन कुछ नहीं कर पाता है। लेकिन अगर आंतरिक सुरक्षा कम पड़ती है, तो बाहरी दुश्मन भी सर उठाने लगते हैं। इसलिए जो भूमिका सीमाओं पर हमारी सेनाओं की है, देश के भीतर वही भूमिका आप सब सुरक्षा बलों की है। आपने देश की एकता, अखंडता के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं। आपने असीम त्याग किया है।"
देश आपकी सेवाओं के लिए है ऋणी
उन्होंने कहा, "देश की आंतरिक सुरक्षा में लगे सुरक्षा बल, हमारे सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी के एक-एक जवान और राज्यों की पुलिस का एक-एक सिपाही, बस्तर फाइटर्स जैसे स्पेशल फोर्स के जवान, महिला फाइटर्स, यह देश आपकी सेवाओं के लिए आपका ऋणी है।"
विपक्ष पर पीएम मोदी ने साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर आप 2004 से 2013 तक के आंकड़ों पर नजर डालेंगे, तो पाएंगे कि हर साल नक्सलियों के मारे जाने के मुकाबले हमारे बहादुर जवानों के बलिदान होने की संख्या ज्यादा थी। दुर्भाग्य से, उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने इस समस्या को ऐसे ही छोड़ दिया। दुश्मनों के सामने यह सोचकर बैठ जाना कि हालात ऐसे ही चलते रहेंगे, किसी भी देश के लिए सही नहीं हो सकता।
माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी
उन्होंने कहा, "माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी। नक्सलियों ने लोगों से वोट डालने का अधिकार तक छीन लिया था। एक साल में नक्सली हमलों की संख्या 2,000 तक पहुंच गई थी।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "2010 में पास के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान सीआरपीएफ के हमारे 76 जवान बलिदान हो गए थे। उसी साल दंतेवाड़ा में हुई एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।"
पीएम ने कहा, "यह धरती हमारे बहादुर जवानों के खून से लाल हो गई थी। लेकिन महलों में रहने वाले उन प्रभावशाली नेताओं की ओर से दुख जताने वाली एक आवाज तक नहीं आई। उनकी आंखों से एक आंसू तक नहीं निकला। लगभग हर दिन कहीं न कहीं ऐसे हमले होते रहे। यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा। इस दौरान अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए।"
पिछले एक साल में एक भी जवान शहीद नहीं हुआ
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए हमें मजबूत इरादों और सही रणनीति के साथ देश के दुश्मनों का सामना करना होगा और उन्हें हराना होगा। ऐसा करने के लिए देश में जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी, उसे 2014 में मजबूती मिली। आपने इस प्रधानसेवक को मां भारती की सेवा करने का अवसर दिया और हमने देखा कि 2014 के बाद हालात कैसे बदलने लगे।
उन्होंने कहा, ''लंबे समय तक हमने देखा कि नक्सलियों के मुकाबले हमारे ज्यादा जवान बलिदान हो रहे थे। लेकिन 47 साल में पहली बार एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान बलिदान नहीं हुआ। यह देश की सही नीतियों और मजबूत इरादों की जीत है। यह आप सभी के शौर्य, साहस और संयम की जीत है।''
सरकार के फैसलों से कमजोर पड़ा नक्सलवाद
पीएम मोदी ने कहा, ''किसी भी काम में सफलता पाने के लिए सही नीयत और सही नीतियां जरूरी हैं। देश की सुरक्षा के लिए हमने एक के बाद एक कई कड़े फैसले लिए। ऐसे कई कदम भी उठाए गए, जिनके बारे में आज भी लोगों को जानकारी नहीं है। इन फैसलों और प्रयासों से नक्सलियों और अलगाववादियों को मिलने वाले पैसों पर बड़ा असर पड़ा।''
नकली नोटों का नेटवर्क खत्म किया
उन्होंने कहा, ''नकली नोटों के नेटवर्क को खत्म किया गया। इससे न केवल उनकी आर्थिक ताकत कमजोर हुई, बल्कि हथियार और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का रास्ता भी बंद हो गया। इसके परिणामस्वरूप नक्सलियों तक हथियारों की सप्लाई रुक गई। साथ ही, उनकी आवाजाही और नए लोगों की भर्ती पर भी रोक लग गई।''
50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए
प्रधानमंत्री ने कहा, ''जब हम देश के लिए काम करते हैं, तो इससे देश में शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। पिछले 12 वर्षों में देश ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई लड़ी है। इस साल दिवाली से ठीक पहले, कुछ दिन पहले विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं।''
उन्होंने कहा, ''गरीबी हटाने के नारों के साथ दशकों में जो हासिल नहीं हो सका, वह देश ने सिर्फ 12 वर्षों में कर दिखाया है। सोचिए, यह कितनी बड़ी उपलब्धि है। दिवाली के दौरान हम रंगोली बनाते हैं। हमने भी कल्याणकारी योजनाओं की ऐसी रंगोली बनाई, जिसने लगातार गरीबों को सशक्त बनाने का काम किया।''
माओवादी आतंकवाद की तोड़ी कमर
पीएम मोदी ने कहा, ''पिछली सरकारों ने जमीन पर लड़ाई लड़ रहे सुरक्षाकर्मियों के हाथ भी बांध रखे थे। नक्सली हमले करते थे, लेकिन सुरक्षा बलों को खुलकर जवाब देने की आजादी नहीं थी। हमने सुरक्षा बलों को जरूरी फैसले लेने की पूरी छूट दी। हमने सरकार और व्यवस्था के भीतर कुछ लोगों की ओर से वामपंथी उग्रवाद को मिलने वाले समर्थन को रोकने के लिए भी काम किया। हमने संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी।''
उन्होंने कहा, ''सेवा भाव के साथ हमने नक्सल प्रभावित इलाकों के लोगों की जिंदगी बदलने का काम किया। यही वजह है कि नक्सलवाद से परेशान रहे लोग भी आज सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं। इस बड़ी लड़ाई को जीतने में अहम योगदान देने वाले कई नागरिक भी आज यहां मौजूद हैं। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं।''
अब दिमागी नक्सलियों से खतरा
जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों का सफाया हो गया है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। कई संगठनों में 'दिमागी नक्सलियों' ने जगह बना ली है। वे लोगों को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़का रहे हैं।
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