रूसी तेल को मात देने की अमेरिकी रणनीति: जामनगर पहुंचे विदेश मंत्री मार्को रूबियो, दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का कर रहे रुख

जामनगर पहुंचे विदेश मंत्री मार्को रूबियो, दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का कर रहे रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इस समय भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। बेहद दिलचस्प बात यह है कि देश के सबसे शीर्ष राजनयिक अपनी इस यात्रा में राजधानी नई दिल्ली जाने के बजाय सीधे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके बाद गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का रुख कर रहे हैं।

इस दौरे को भारत-अमेरिका के कूटनीतिक इतिहास में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां चर्चा का मुख्य विषय रक्षा सौदे या सीमा विवाद नहीं, बल्कि रूसी तेल का विकल्प, कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता और अमेरिका का डीजल संकट है।

जामनगर ही क्यों जा रहे हैं अमेरिकी विदेश मंत्री?

वाशिंगटन और कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, रूबियो के जामनगर जाने के पीछे तीन बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण हैं। पहला अमेरिका में आने वाले समय में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं और वहां इस वक्त डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक बाजार में डीजल की किल्लत बनी रह सकती है। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में बहुत बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाला डीजल बनाने और उसे एक्सपोर्ट करने की क्षमता है। अमेरिका अपनी घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जामनगर से डीजल आपूर्ति का विकल्प देख रहा है।

टेक्सास में रिलायंस का $300 बिलियन का निवेश

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन टेक्सास के ब्राउन्सविले में एक विशाल रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज बड़ा निवेश कर रही है। इस परियोजना की कुल वैल्यू $300 बिलियन (करीब 258 बिलियन यूरो) आंकी गई है। रूबियो इस दौरे के जरिए इस ऐतिहासिक निवेश को रेखांकित करना चाहते हैं जो अमेरिकी राजनीति के मुख्य केंद्र टेक्सास से जुड़ा है।

रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी दबाव

भारत इस समय रूस से भारी मात्रा में रियायती 'यूराल्स' कच्चा तेल खरीद रहा है। हालांकि हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए भारत जैसे देशों को कुछ प्रतिबंधों से फौरी राहत जरूर दी है, लेकिन वाशिंगटन अब भी चाहता है कि भारत रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करे।

क्या वेनेजुएला बनेगा रूसी तेल का नया विकल्प?

इस दौरे का सबसे बड़ा कूटनीतिक पहलू वेनेजुएला का तेल समीकरण है। अमेरिका की रणनीति यह है कि यदि भारत को रूस से दूर करना है, तो उसे कच्चे तेल का कोई अन्य सस्ता और व्यावहारिक विकल्प देना होगा। यहीं पर वेनेजुएला की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। वेनेजुएला का कच्चा तेल बेहद भारी और अधिक सल्फर वाला होता है, जिसे रिफाइन करना हर किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन जामनगर रिफाइनरी दुनिया के उन चुनिंदा प्लांट्स में से एक है जिसके पास इस भारी तेल को कुशलतापूर्वक प्रोसेस करके प्रीमियम पेट्रोल और डीजल बनाने की आधुनिक तकनीक है।

प्रतिबंधों में ढील और रिलायंस की स्थिति

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति काफी समय से बाधित थी, लेकिन हाल ही में अमेरिका से विशेष लाइसेंस और मंजूरियां मिलने के बाद रास्ते फिर खुल गए हैं। वर्तमान में रिलायंस, वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने वाली दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है।

सस्ता तेल और बड़ा मुनाफा

अमेरिकी नियमों के तहत यदि रिलायंस वेनेजुएला से रियायती दरों पर भारी तेल खरीदती है, तो इससे कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में जबरदस्त सुधार होगा, जिससे कंपनी को सालाना ₹1,000 करोड़ से लेकर ₹4,200 करोड़ तक का अतिरिक्त वित्तीय मुनाफा हो सकता है।

कूटनीतिक मुलाकात और आगे की राह

अपनी इस यात्रा के दौरान मार्को रूबियो मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक भी कर रहे हैं। इसके साथ ही वे भारत के शीर्ष उद्योगपतियों से भी मुलाकात करेंगे।

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