स्मृति शेष: चार बार नौकरी से हुए थे बर्खास्त, एक महीने तक जेल में रहे केएल गुप्ता

गोरखपुर|
चार बार नौकरी से हुए थे बर्खास्त, एक महीने तक जेल में रहे केएल गुप्ता

रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना केएल गुप्ता (कन्हैया लाल गुप्ता ) के जीवन का सबसे अहम उद्देश्य रहा। इस लड़ाई में उन्हें चार बार नौकरी से बर्खास्त होना पड़ा और एक महीने तक जेल में भी रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बांसगांव के रहने वाले थे केएल गुप्ता

बांसगांव के रहने वाले केएल गुप्ता ने भारतीय सेना में 10 सालों तक नौकरी की। इसके बाद वर्ष 1946 में रेलवे की नौकरी शुरू की और जल्द ही पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) से जुड़ गए। 14 अप्रैल 1952 को पूर्वोत्तर रेलवे के गठन के समय से ही उन्होंने यूनियन के महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली। रेलकर्मियों के बीच उनकी स्वीकार्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह 67 बार महामंत्री चुने गए। हर बार ध्वनिमत से उनका निर्वाचन हुआ। वर्ष 2025 में उन्होंने महामंत्री का पद छोड़कर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

आखिरी समय तक कर्मचारियों का करते रहे मार्गदर्शन

केएल गुप्ता की सबसे बड़ी पहचान उनका असाधारण संगठनात्मक रिकॉर्ड रहा। उन्होंने नरमू के महामंत्री के रूप में लगातार 60 बार जिम्मेदारी संभाली। ट्रेड यूनियन के इतिहास में यह एक बेहद उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है। कर्मचारियों के बीच उनकी लोकप्रियता, नेतृत्व क्षमता और संगठन के प्रति समर्पण का ही नतीजा था कि सदस्य बार-बार उन्हें अपना नेता चुनते रहे। उम्र और अस्वस्थता के चलते पिछले साल उन्होंने महामंत्री का पद छोड़ दिया था, लेकिन अध्यक्ष के रूप में अंत तक संगठन से जुड़े रहे और कर्मचारियों का मार्गदर्शन करते रहे।

108 साल की उम्र में भी बुलंद थी कर्मचारियों की आवाज

केएल गुप्ता ने अपने पूरे जीवन में रेल कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्ष किया। संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को लगातार उठाया। वर्ष 1977 में मधुकर दिघे के आंदोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उम्र के आखिरी पड़ाव तक उनका संघर्ष जारी रहा। 108 वर्ष की उम्र में भी वह कर्मचारियों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए मंचों पर पहुंचते और ओजस्वी भाषण देते थे।

यूनियन के पूर्व सेक्रेटरी शैलेश श्रीवास्तव के मुताबिक, इस उम्र में भी उनकी ऊर्जा और सक्रियता देखते बनती थी। इसी वजह से लोग उन्हें प्यार से '108 साल का युवा' कहते थे। वह रैलियों में पैदल चलकर पहुंच जाते थे और कर्मचारियों के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाते थे।

रेलवे बोर्ड तक थी उनकी बात की अहमियत

केएल गुप्ता की संगठनात्मक ताकत और प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेलवे बोर्ड तक उनकी बात गंभीरता से सुनी जाती थी। शैलेश श्रीवास्तव बताते हैं कि किसी कर्मचारी समस्या या मुद्दे पर उनका नाम सामने आते ही बोर्ड के अधिकारी भी सतर्क हो जाते थे। उनकी बात सुनने के बाद समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की जाती थी।

उनका जीवन बेहद सादगीपूर्ण रहा। वह ताउम्र साधारण कुर्ता-पायजामा पहनते रहे और खानपान में भी सादगी बरतते थे। भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर रहकर उन्होंने अपना जीवन कर्मचारी आंदोलन को समर्पित कर दिया। संघर्षों के साथ-साथ उन्हें कई आरोपों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में अपना पक्ष मजबूती से रखा।

परिवार के लिए कभी नहीं की नौकरी की पैरवी

ईमानदारी और सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कभी अपने बच्चों के लिए किसी अधिकारी से नौकरी की पैरवी नहीं की। शैलेश श्रीवास्तव के अनुसार, चाहते तो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर परिवार के सदस्यों को अच्छी नौकरियां दिलवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया।

वर्ष 1981 में सेवानिवृत्ति से पहले ही उनकी पत्नी का निधन हो गया था। उनकी एक बेटी और एक बेटा था। बेटी का भी करीब दस वर्ष पहले निधन हो चुका है। छह वर्ष पहले बहू की भी मृत्यु हो गई थी। परिवार में बेटा, दो पोतियां और दो पोते हैं। पोते-पोतियों की अभी शादी नहीं हुई है। सभी निजी क्षेत्र में काम करते हैं।

कर्मचारी संगठनों ने जताया गहरा शोक

केएल गुप्ता के निधन पर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन, एनई रेलवे मजदूर यूनियन समेत विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्र, सहायक महामंत्री एवं नरमू के महामंत्री बसंत लाल चतुर्वेदी, जोनल सेक्रेटरी एवं यूनियन के संयुक्त महामंत्री ओंकार नाथ सिंह तथा मंडल मंत्री संजय कुमार पांडेय ने उनके निधन को रेलवे मजदूर आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि केएल गुप्ता ने अपना पूरा जीवन रेल कर्मचारियों के हक और सम्मान की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। केएल गुप्ता का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, सादगी, ईमानदारी और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल रहेगा। 60 बार महामंत्री चुने जाने का उनका रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बीच उनकी लोकप्रियता लंबे समय तक याद की जाएगी।

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