भोजपुर एनकाउंटर पर बढ़ा विवाद: हाईवे पर बॉडी रखकर 5 घंटे किया चक्काजाम, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

भोजपुर जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के मामले ने नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। गुरुवार को मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने बॉडी को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन मार्ग को करीब पांच घंटे तक जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान लाठीचार्ज भी किया गया। इस कार्रवाई में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी नहीं था। उसने पुलिस के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी। लोगों का कहना है कि यदि उसने सरेंडर कर दिया था तो उसे गोली मारने की आवश्यकता क्यों पड़ी? प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि भरत को कई गोलियां मारी गईं। जबकि पुलिस उसे जीवित भी गिरफ्तार कर सकती थी। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
बाढ़ राहत को लेकर शुरू हुआ था विवाद
ग्रामीणों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री नहीं पहुंचने के आरोपों से हुई। बताया जा रहा है कि भरत तिवारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नाराजगी व्यक्त की थी। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और शाहपुर थाना पुलिस उसके घर पहुंची। परिजनों का आरोप है कि पुलिस और परिवार के बीच उस समय तीखी नोकझोंक हुई थी। इससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
फेसबुक लाइव और फायरिंग से बढ़ा मामला
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब भरत तिवारी ने कथित रूप से हथियार लेकर पुलिस का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने अपने घर की छत पर चढ़कर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की। सोशल मीडिया पर लाइव आकर प्रशासन के खिलाफ बयान दिए। इसके बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी। बाद में भरत अपने घर से निकलकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गया। जहां पुलिस और उसके बीच फिर आमना-सामना हुआ। जानकारी के अनुसार, इस दौरान भी उसने सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण किया और अपनी मांगों को दोहराया। पुलिस का दावा है कि भरत की ओर से लगातार फायरिंग की जा रही थी। इसके जवाब में जवाबी कार्रवाई की गई।
निष्पक्ष जांच की मांग
भरत तिवारी की मौत के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। परिजन और ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि मुठभेड़ के अंतिम क्षणों में वास्तव में क्या हुआ? क्या आत्मसमर्पण की कोई कोशिश की गई थी। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि उसने परिस्थितियों के अनुरूप कार्रवाई की। पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। फिलहाल प्रशासन क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए हुए है। मामले ने राज्यभर में चर्चा का विषय बनते हुए पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था के तरीकों पर नई बहस छेड़ दी है।
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