दिल्ली में बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़: नौ संदिग्ध अरेस्ट, हथियार और विस्फोटक बरामद

नई दिल्ली|8 घंटे पहले
नौ संदिग्ध अरेस्ट, हथियार और विस्फोटक बरामद

राजधानी दिल्ली में संभावित आतंकी हमले की एक बड़ी साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते विफल कर दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अभियान में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद इब्राहिम के अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के तहत कुल नौ संदिग्धों को अरेस्ट किया है। कार्रवाई के दौरान हथियार, हैंड ग्रेनेड और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद होने का दावा किया गया है। इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। कथित तौर पर राजधानी में महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों, सुरक्षा बलों के ठिकानों तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों के संबंध पाकिस्तान समर्थित हैंडलर्स और संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे मॉड्यूल की गतिविधियों और इसके इंटरनेशनल संपर्कों की गहराई से जांच कर रही हैं।

फंडिंग और स्थानीय नेटवर्क की पड़ताल

सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में कुछ नेपाल मूल के व्यक्तियों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। एजेंसियों का मानना है कि इन लोगों को विशेष प्रशिक्षण और निर्देश देकर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित मॉड्यूल का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था। इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। जबकि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी तेज कर दी गई है।

अपडेट्स

8 घंटे पहले

ISI समर्थित मॉड्यूल पर एजेंसियों का शिकंजा

एजेंसियां अब इस मॉड्यूल के फंडिंग स्रोतों, भर्ती तंत्र और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही उन स्थानीय सहयोगियों और विदेशी हैंडलर्स की भूमिका भी खंगाली जा रही है। जो कथित तौर पर इस नेटवर्क को संचालित करने में शामिल थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मॉड्यूल केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई राज्यों और सीमा पार बैठे संचालकों से जुड़े हो सकते हैं।

हालिया गिरफ्तारियों ने बढ़ाई चिंता

पिछले दो महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई मामलों का खुलासा हुआ है। जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मई माह में उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ ने चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि ये आरोपी भाजपा कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। वहीं अप्रैल में पंजाब के अमृतसर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने ISI समर्थित एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को अरेस्ट किया था। उनके कब्जे से हैंड ग्रेनेड और विदेशी निर्मित ग्लॉक पिस्टल बरामद की गई थी।

पुलिस द्वारा बरामद किए गए हथियार।
पुलिस द्वारा बरामद किए गए हथियार।

दिल्ली ब्लास्ट के बाद और सतर्क हुई एजेंसियां

सुरक्षा एजेंसियां नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट को भी गंभीर चेतावनी के रूप में देख रही हैं। उस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी। वहीं कई अन्य घायल हुए थे। जांच में उस घटना के पीछे AQIS (अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट) से जुड़े मॉड्यूल की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद से राजधानी सहित देश के प्रमुख शहरों में खुफिया निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बनाते हैं संपर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार आधुनिक आतंकी नेटवर्क अब सीधे घुसपैठ की बजाय स्थानीय मॉड्यूल और डिजिटल कम्युनिकेशन पर अधिक निर्भर हो गए हैं। इसके तहत स्थानीय युवाओं या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की भर्ती की जाती है। फर्जी पहचान पत्र, सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल कर नेटवर्क को सक्रिय रखा जाता है। सीमा पार बैठे हैंडलर्स एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क बनाए रखते हैं। फंडिंग के लिए हवाला चैनलों का उपयोग किया जाता है। जबकि किराये के मकानों और सेफ हाउस को ऑपरेशन बेस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

तकनीक और इंटेलिजेंस के सहारे कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसियां ऐसे नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और खुफिया तंत्र का सहारा ले रही हैं। संदिग्ध फोन कॉल, इंटरनेट गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की निगरानी की जाती है। गिरफ्तार आरोपियों से बरामद मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाता है। इसके अलावा मुखबिर नेटवर्क, राज्यों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग और विदेशी एजेंसियों से प्राप्त इनपुट के आधार पर भी कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकी गतिविधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत हर संदिग्ध कड़ी की जांच की जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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