सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा: असम के सीएम से की मुलाकात, भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज

दिल्ली|10 जून 2026
असम के सीएम से की मुलाकात, भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सीनियर नेता और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। इस्तीफे के तुरंत बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने से राजनीतिक गलियारों में उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी लगातार आंतरिक चुनौतियों और असंतोष का सामना कर रही है। पिछले तीन दिनों में पार्टी के दो राज्यसभा सांसदों ने पद छोड़ दिया है। इससे पहले सुखेंदु शेखर ने भी राज्यसभा सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। सुखेंदु शेखर ने चुनावी हार और संगठनात्मक कमजोरियों को पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

टीएमसी में बढ़ रही अंदरूनी खींचतान

राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद पार्टी नेतृत्व और रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं और विधायकों का एक वर्ग संगठन में फैसलों के केंद्रीकरण और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असहज बताया जा रहा है। हाल ही में पार्टी के कई विधायकों द्वारा अलग गुट बनाने की खबरों ने भी इस संकट को और गहरा कर दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। विरोधी गुट का मानना है कि महत्वपूर्ण निर्णय सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं, जिससे संगठनात्मक असंतोष बढ़ा है। नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर हुए विवाद और कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा प्रकरण ने भी पार्टी के भीतर की खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।

संकट से उबरने की कोशिश में नेतृत्व

टीएमसी नेतृत्व पार्टी को एकजुट रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हाल के दिनों में ममता बनर्जी ने कांग्रेस की सीनियर लीडर सोनिया गांधी से मुलाकात की। जबकि अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी के साथ बैठक कर विपक्षी एकता और राजनीतिक समन्वय पर चर्चा की। इसके अलावा इंडिया गठबंधन की बैठक में भी टीएमसी की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। हालांकि, सुष्मिता देव के इस्तीफे ने इन प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। यदि वह भाजपा में शामिल होती हैं तो यह टीएमसी के लिए राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों स्तर पर नुकसानदायक माना जाएगा।

राजनीतिक समीकरणों पर नजर

सुष्मिता देव के अगले कदम को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन उनकी हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात ने अटकलों को बल दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं। फिलहाल टीएमसी नेतृत्व नुकसान की भरपाई और संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है।

नव्य जागरण

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