यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा विस्तार: मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर हुई 83, 10 साल में बदली तस्वीर

लखनऊ|1 घंटा पहले
मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर हुई 83, 10 साल में बदली तस्वीर

योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ लंबी समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे सुधारों का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और इमरजेंसी सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। साथ ही एम्बुलेंस सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने और डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए संविदा एमबीबीएस डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाने का फैसला भी लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को समय पर इलाज और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा में हुए बड़े बदलावों की विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की गई।

बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016-17 की तुलना में उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो चुकी है। यह लगभग 89 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि मानी जा रही है। इसी अवधि में एमबीबीएस सीटों की संख्या 5,390 से बढ़कर 12,800 तक पहुंच गई, जबकि पीजी सीटें 1,344 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं। सुपर स्पेशियलिटी कोर्स की सीटों में भी 165 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं। इसके अलावा 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांचें मुफ्त कराई गईं, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को बड़ी राहत मिली।

दवाओं की गुणवत्ता और एम्बुलेंस सेवाओं पर सख्ती

मुख्यमंत्री ने मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता पर सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि किसी भी अस्पताल में तीन महीने से कम एक्सपायरी अवधि वाली दवाएं नहीं रखी जानी चाहिए। ऐसी दवाओं को तत्काल हटाकर नया स्टॉक उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही 108 एम्बुलेंस और एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस सेवाओं की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटना या गंभीर स्थिति में मरीज तक एम्बुलेंस के पहुंचने का समय न्यूनतम होना चाहिए, ताकि गोल्डन ऑवर में इलाज सुनिश्चित किया जा सके।

लखनऊ के बड़े संस्थानों में बढ़ेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

राजधानी लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में भी बड़े विस्तार की तैयारी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 1010 बेड क्षमता वाले नए अत्याधुनिक अस्पताल ब्लॉक को मंजूरी दी गई है। यहां अब तक 376 से अधिक रोबोटिक सर्जरी और 250 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। संस्थान में प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। वहीं संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में बच्चों के लिए 500 बेड वाले एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर का निर्माण तेजी से चल रहा है।

आयुष और डिजिटल हेल्थ सिस्टम को भी बढ़ावा

राज्य सरकार ने ‘दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी आयुष पद्धतियों को भी इसमें शामिल करने का फैसला लिया है। अब राज्य कर्मचारियों को इन चिकित्सा पद्धतियों में भर्ती होकर इलाज कराने पर भी कैशलेस सुविधा मिलेगी। इसके अलावा यूपी ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (UPTEN) और ‘प्रोजेक्ट सुश्रुत’ के तहत पूरे प्रदेश में इमरजेंसी हेल्थ नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ के अंतर्गत प्रदेश में 15 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जिससे डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम को मजबूती मिल रही है।

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