UP-TET आंसर-की पर उठे सवाल: 4 प्रश्नों के उत्तरों पर जताई आपत्ति, 17.70 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा

लखनऊ|1 घंटा पहले
4 प्रश्नों के उत्तरों पर जताई आपत्ति, 17.70 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा की प्रारंभिक आंसर-की जारी होने के बाद नए विवाद ने जन्म ले लिया है। कई अभ्यर्थियों और बीटीसी शिक्षक संघ ने चार प्रश्नों के उत्तरों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए दावा किया है कि आयोग ने कुछ गलत विकल्पों को सही घोषित कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि अंतिम उत्तर-कुंजी में संशोधन नहीं किया गया तो हजारों परीक्षार्थियों के अंक प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर अभ्यर्थी प्रमाणों के साथ ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।

बीटीसी शिक्षक संघ के अनुसार, दो, तीन और चार जुलाई को प्रदेश के 955 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित परीक्षा में करीब 17.70 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जो कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों का 88.77 प्रतिशत हैं। इनमें लगभग 1.86 लाख ऐसे शिक्षक भी शामिल रहे, जिन्हें 31 अगस्त 2027 तक टेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

चार सवालों पर सबसे अधिक विवाद

अभ्यर्थियों ने जिन चार प्रश्नों पर प्रमुख आपत्ति दर्ज कराई है, उनमें पर्यावरण, हिंदी और संस्कृत विषय शामिल हैं। पर्यावरण के प्रश्न संख्या 146 में 'डिजास्टर' की परिभाषा को लेकर आयोग के उत्तर पर सवाल उठाए गए हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि आयोग ने 'इमरजेंसी' की परिभाषा को सही उत्तर मान लिया, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 और यूएनडीआरआर की परिभाषा के अनुसार सही उत्तर अलग होना चाहिए। हिंदी के प्रश्न संख्या 45 में तत्सम-तद्भव से जुड़े प्रश्न में एक से अधिक विकल्प सही होने का दावा किया गया है। वहीं प्रश्न संख्या 53 में 'एक आंख से देखना' मुहावरे का अर्थ आयोग ने "अंधाधुंध करना" माना है, जबकि अभ्यर्थियों के अनुसार मानक हिंदी शब्दकोशों में इसका अर्थ "समान व्यवहार करना या पक्षपात न करना" बताया गया है। संस्कृत के प्रश्न संख्या 65 में 'ऊष्म वर्ण' से संबंधित उत्तर को भी अभ्यर्थियों ने गलत बताया है।

साक्ष्यों के साथ आपत्ति दर्ज कराने की अपील

बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव और विषय विशेषज्ञों ने प्रभावित अभ्यर्थियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर प्रमाण सहित आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे अंतिम आंसर-की में आवश्यक संशोधन संभव होगा और अभ्यर्थियों के उचित अंक सुरक्षित रह सकेंगे।

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