ईवी अपनाने में उत्तर प्रदेश ने पकड़ी रफ्तार: राष्ट्रीय बाजार में 18 प्रतिशत पहुंची हिस्सेदारी, 86 हजार से अधिक आवेदन स्वीकृत

उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की सब्सिडी नीति और आवेदन प्रक्रिया में तेजी का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। सरकार के अनुसार, देश में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से सब्सिडी वितरण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और आवेदन प्रक्रिया को लगातार सरल एवं तेज बनाया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 86,489 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 43 हजार से अधिक लाभार्थियों को अनुदान राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। दोपहिया, चारपहिया, ई-बस और ई-गुड्स कैरियर श्रेणी में कुल 15,091 आवेदन स्वीकृत हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 13,950 आवेदन मंजूर किए गए थे। जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 47,514 तक पहुंच गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 241 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं 1 अप्रैल 2026 से 22 जून 2026 के बीच, यानी ढाई महीने से भी कम समय में 9,934 नए आवेदन स्वीकृत किए गए हैं।
दोपहिया ईवी की सबसे अधिक मांग
प्रदेश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। अब तक 61,417 इलेक्ट्रिक दोपहिया, 24,959 चारपहिया, 104 ई-गुड्स कैरियर और 9 ई-बसों के लिए सब्सिडी आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल संख्या 15 लाख तक पहुंच चुकी है, जो राज्य में तेजी से बढ़ते ईवी इकोसिस्टम का संकेत है।
चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर भी फोकस
ईवी को बढ़ावा देने के साथ सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत कर रही है। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 2,316 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इनमें 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए राज्य में लगभग 38 हजार चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता का आकलन किया गया है। सरकार इन्हें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत एक्सप्रेसवे, प्रमुख शहरों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और पर्यटन स्थलों पर विकसित करेगी। यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हाईस्पीड चार्जर पहले ही लगाए जा चुके हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ आवेदन
ईवी सब्सिडी के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जा रहे हैं। आवेदक पोर्टल पर पंजीकरण कर वाहन संख्या दर्ज करते हैं, जिसके बाद वाहन से संबंधित विवरण स्वतः भर जाता है। बैंक खाते और आईएफएससी कोड जैसी जानकारी दर्ज करने के बाद आवेदन बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया से गुजरता है। अंतिम सत्यापन परिवहन निरीक्षक (टीआई) द्वारा किया जाता है। नई व्यवस्था के तहत ई-बस को छोड़कर अन्य सभी श्रेणियों के आवेदन और भुगतान का निस्तारण संबंधित आरटीओ कार्यालयों के माध्यम से किया जा रहा है।
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