प्रोटीन और फाइबर से भरपूर दालें भी करती है मानसून में दिक्कत: खाने से बढ़ सकती है पेट की समस्या, बरते सावधानी

4 घंटे पहले
खाने से बढ़ सकती है पेट की समस्या, बरते सावधानी

मांनसून का मौसम चल रहा है। ऐसे में खाने-पीने का खास ध्यान रखना चाहिए। बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन खान-पान को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बारिश के मौसम में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं, जिसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है।

वैसे तो दालें प्रोटीन, फाइबर और कई पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत होती हैं, लेकिन हर दाल हर मौसम में शरीर के लिए आसानी से पचने वाली नहीं होती। कुछ दालें बारिश के दिनों में गैस, पेट फूलना, अपच और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ा सकती हैं। खासकर जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उन्हें मानसून में दालों का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए।

पौ​​ष्टिक और प्रोटीन से भरपूर होती है उड़द दाल

उड़द दाल को पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर माना जाता है, लेकिन यह शरीर में भारी मानी जाने वाली दालों में शामिल है। बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कई लोगों का पाचन तंत्र सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा कमजोर हो जाता है। ऐसे में उड़द दाल का ज्यादा सेवन करने से पेट में गैस, अपच, पेट फूलना और भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर इसका सेवन कर रहे हैं तो इसे अच्छी तरह भिगोकर और पकाकर खाएं। इसमें हींग, जीरा, अदरक जैसे मसालों का इस्तेमाल करने से पाचन में मदद मिल सकती है।

प्रोटीन और फाइबर का स्त्रोत चना दाल

चना दाल प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने पर यह कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। बारिश के मौसम में पाचन क्रिया धीमी होने के कारण चना दाल को पचाने में समय लग सकता है। इसका अधिक सेवन करने से गैस, पेट फूलना, कब्ज और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस या आंतों से जुड़ी समस्या रहती है, ऐसे लोगों को चना दाल खाने से पहले कुछ घंटों के लिए भिगोकर रखें और फिर अच्छी तरह पकाकर खायें। इसे हल्के मसालों के साथ बनाकर खाने से पाचन संबंधी परेशानी कम हो सकती है।

राजमा दाल में प्रोटीन, फाइबर, और आयरन की मात्रा ज्यादा

राजमा कई लोगों की पसंदीदा डिश है और इसमें प्रोटीन, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हालांकि, इसे पचने में समय लगता है। मानसून के दौरान जब पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है, तब राजमा खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट दर्द, अपच और ब्लोटिंग की शिकायत हो सकती है। राजमा को कभी भी जल्दी-जल्दी या अधपका नहीं खाना चाहिए। इसे कम से कम कई घंटों तक पानी में भिगोने के बाद अच्छी तरह पकाना जरूरी है। अधपके राजमा में मौजूद कुछ तत्व पेट की परेशानी बढ़ा सकते हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर छोले

छोले प्रोटीन, फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इन्हें भी भारी भोजन माना जाता है। मानसून में ज्यादा मात्रा में छोले खाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है। इससे गैस, पेट फूलना, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर उन लोगों को जिनके पेट में जलन या गैस की समस्या रहती है, उन्हें बारिश के दिनों में छोले कम मात्रा में खाने चाहिए। छोले बनाने से पहले उन्हें अच्छी तरह भिगोना और पूरी तरह गलाकर पकाना जरूरी है।

मानसून में दाल खाते समय बरते सावधानी

दालों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं। पर्याप्त समय तक भिगोकर पकाएं। बहुत ज्यादा मसाले और तेल का इस्तेमाल न करें। ताजी बनी दाल ही खाएं, लंबे समय तक रखी हुई दाल से बचें। दाल में अदरक, जीरा और हींग से मसाले शामिल कर सकते हैं, जो पाचन में मदद कर सकते हैं।

नव्य जागरण

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