अ​​धिक गुस्सा सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक: बढ़ जाता है हार्ट और ब्लड प्रेशर का खतरा, दिमाग पर पड़ता है नकारात्मक असर

निवेदिता चंद|1 घंटा पहले
बढ़ जाता है हार्ट और ब्लड प्रेशर का खतरा, दिमाग पर पड़ता है नकारात्मक असर

अत्यधिक गुस्सा आने वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। गुस्सा मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। आप भी ऐसे एक-दो लोगों को जरूर जानते होंगे जिन्हें बहुत ज्यादा गुस्सा आता है। अक्सर लोग ऐसे लोगों से बचते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गुस्सा एक स्वाभाविक और सर्वाइवल मैकेनिज्म है जो खतरों, पूरी न होने वाली जरूरतों या सीमाओं के उल्लंघन की स्थिति में आता है। पर अगर किसी को बार-बार या बहुत ज्यादा गुस्सा आता है तो न सिर्फ सामाजिक रूप से बल्कि सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।

बार-बार या बहुत ज्यादा गुस्सा करना केवल रिश्तों को ही नहीं, बल्कि आपके पूरे शरीर को भी नुकसान पहुंचा सकता है? अक्सर लोग गुस्से को सिर्फ एक इमोशनल रिएक्शन मानते हैं, जबकि मेडिकल साइंस इसे शरीर में होने वाली कई जैविकऔर हार्मोनल प्रतिक्रियाओं से जोड़कर देखती है। गुस्सा के कारण शरीर में एड्रेनालाईन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। इसका असर सीधे दिल-दिमाग और ब्लड प्रेशर के साथ सांस लेने की गति और यहां तक कि पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। कई अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि जिन लोगों को ज्यादा गुस्सा आता है उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी अधिक होता है।

ज्यादा गुस्सा बीमारियों का घर

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ मिनट का गुस्सा वैसे तो नुकसानदायक नहीं है, लेकिन यदि आपको बार-बार या अक्सर गुस्सा आता है तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, डिप्रेशन और कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि गुस्से को कंट्रोल करने वाले तरीके अपनाकर नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की तकनीक मददगार हो सकती है।

गुस्से में बढ़ जाता है हार्ट और ब्लड प्रेशर का खतरा

गुस्से के दौरान हृदय को सामान्य से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है। एड्रेनालिन बढ़ने से दिल तेजी से रक्त पंप करता है, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या ब्लॉकेज की समस्या है, तो गुस्सा हार्ट अटैक या एंजाइना का ट्रिगर बन सकता है। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि तेज गुस्से के तुरंत बाद कुछ घंटों तक हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है।

दिमाग पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव

अत्यधिक गुस्से की स्थिति में मस्तिष्क तर्क और सही निर्णय लेने वाला हिस्सा कम प्रभावी हो जाता है। यही कारण है कि गुस्से में लोग अक्सर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं या ऐसी बातें कह देते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है। लगातार तनाव और गुस्सा के कारण याददाश्त कम होने, ध्यान न लगने और मानसिक संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

90 सेकेंड के रूल से कंट्रोल करें गुस्सा

गुस्से को कंट्रोल करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ 90 सेकंड का रूल बताते हैं। किसी भी बात पर तुरंत रिएक्ट करने से पहले 90 सेकंड का ब्रेक लें और धीरे-धीरे गहरी सांसें लें। वहां खुद को दूर करने की कोशिश करें, भले ही थोड़ी देर टहलने के लिए ही क्यों न जाएं। इससे स्ट्रेस हार्मोन कम हो सकते हैं। भावनाओं पर तुरंत रिएक्ट करने से बचें। गुस्से की असली वजह पता करें। अक्सर गुस्सा स्ट्रेस, निराशा, डर या दुख को छिपाने का एक तरीका होता है।

नव्य जागरण

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