बारिश में पनपते है बीमारी वाले बैक्टीरिया: दू​षित भोजन के उपयोग से बचें, बढ़ सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

निवेदिता चंद|
दू​षित भोजन के उपयोग से बचें, बढ़ सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

बारिश का मौसम कई बीमारियों को भी अपने साथ लेकर आता है। मानसून शुरू होते ही अस्पतालों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। फूड पॉइजनिंग के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अस्पतालों में भर्ती तक होना पड़ता है। सड़क किनारे मिलने वाले जूस या लंबे समय तक रखा हुआ खाना खाने से ये समस्या बढ़ जाती है।

ज्यादातर लोग पेट दर्द होने पर समझ नहीं पाते कि यह सामान्य अपच है या फूड पॉइजनिंग। कुछ लोग बार-बार होने वाली उल्टी और दस्त पर ध्यान नहीं देते, जिससे शरीर में तेजी से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लग जाती है। पेट में दर्द होने पर अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के पेन किलर या एंटीबायोटिक खा लेते हैं, जिससे बीमारी और गंभीर हो सकती है।

तेजी से बढ़ते है बैक्टीरिया

बारिश के मौसम में साल्मोनेला, ई.कोलाई जैसे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। इनसे दूषित पानी और भोजन से लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसून के दौरान भोजन की स्वच्छता, साफ पानी पीने और ताजा भोजन करने की सलाह देते हैं। डॉक्टर कहते हैं, यदि फूड पॉइजनिंग के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो अधिकांश मामलों में मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

बारिश में बढ़ जाता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक रहती है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से बढ़ते हैं। यदि भोजन को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखा जाए तो उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पनपने लगते हैं। सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, खुले में रखे फल-सब्जियां संक्रमण का कारण बन सकते हैं। मानसून में मक्खियां भी अधिक होती हैं, जो गंदगी से बैक्टीरिया उठाकर भोजन तक पहुंचाती हैं। यही वजह है कि इस मौसम में दस्त, उल्टी और पेट संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।

सामान्य पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग के लक्षण

सामान्य पेट दर्द अक्सर गैस, अपच या ज्यादा खाने की वजह से होता है और कुछ समय में ठीक हो जाता है। लेकिन यदि पेट दर्द के साथ बार-बार उल्टी, दस्त, मतली, बुखार, कमजोरी या पेट में ऐंठन हो रही हो तो यह फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है। कई मामलों में शौच में खून और तेज बुखार की भी दिक्कत हो सकती है।

यदि लक्षण 1-2 दिनों से ज्यादा रहें या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

फूड पॉइजनिंग होने पर बरते सावधानी

यदि फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले शरीर में पानी की कमी न होने दें। ओआरएस का घोल, साफ पानी, नारियल पानी और तरल पदार्थ लेते रहें। शुरुआत में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवा नहीं लेनी चाहिए। लगातार उल्टी, तेज बुखार, शौच में खून जैसे लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।

नव्य जागरण

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