महिलाएं लें रही है 30 की उम्र में फैमिली प्लानिंग का फैसला: बढ़ती उम्र कम कर सकती है गर्भधारण की संभावना, प्रेग्नेंसी से पहले लें जांच और सलाह

निवेदिता चंद|
बढ़ती उम्र कम कर सकती है गर्भधारण की संभावना, प्रेग्नेंसी से पहले लें जांच और सलाह

आजकल की कई महिलाएं 30 की उम्र में फैमिली प्लानिंग शुरू करने का फैसला करती हैं। इसकी वजह करियर, आर्थिक रूप से मजबूत होना या सही पार्टनर का इंतजार हो सकता है। आज के समय में कई ऐसी महिलाएं है जो 30 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं। हालांकि, इस उम्र में फैमिली प्लानिंग करते समय एक जरूरी बात समझना भी बेहद जरूयी है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता कम होने लगती है।

एक्सपर्ट बताते है कि महिलाओं में अंडों की संख्या जन्म से ही तय होती है। 30 की उम्र के बाद अंडों की संख्या और उनकी क्वालिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके अलावा, 35 की उम्र के बाद यह गिरावट और तेज हो सकती है। इसे मेडिकल भाषा में ‘एडवांस्ड मैटरनल एज’ कहा जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इस उम्र में प्रेग्नेंसी संभव नहीं होती। बस उम्र बढ़ने के साथ गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। इसलिए इस उम्र में फैमिली प्लानिंग का फैसला घबराकर नहीं, बल्कि सही जानकारी के साथ लेना चाहिए।

​जरूर लें ​प्री-कन्सेप्शन कंसल्टेशन

एक्‍सपर्ट आगे कहते हैं क‍ि प्रेग्‍नेंसी की कोशिश शुरू करने से पहले सभी मह‍िलाओं और कपल्‍स को एक बार डॉक्टर से प्री-कन्सेप्शन कंसल्टेशन यानी प्रेग्नेंसी से पहले जांच और सलाह जरूर लेना चाहिए। इस दौरान डॉक्टर थायरॉइड, PCOS, एंडोमेट्रियोसिस और एनीमिया जैसी समस्याओं की जांच कर सकते हैं, जो ओव्यूलेशन में परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, विटामिन D और आयरन की जांच से शरीर में किसी कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है। इससे प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

पीरियड साइकल को समझना जरूरी

अपने पीरियड साइकल की लंबाई और फर्टाइल विंडो यानी गर्भधारण के लिए सही समय को समझना जरूरी है। ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट या साइकल को ट्रैक करने से सही समय पर संबंध बनाने में मदद मिल सकती है। उम्र बढ़ने के साथ गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है, इसलिए फर्टाइल दिनों की जानकारी रखना और भी जरूरी हो जाता है।

हेल्दी डाइट रिप्रोड​क्टिव हेल्थ को बनाता है बेहतर

उम्र के साथ प्रेग्रेंसी कंसीव करने की संभावना कम होने लगती है। ऐसे में सही डाइट, वजन और लाइफस्टाइल भी मायने रखते हैं। सही डाइट के ल‍िए मह‍िलाएं हरी पत्तेदार सब्जि‍यां, लीन प्रोटीन, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स वाला संतुलित आहार लें। साथ ही पर्याप्त मात्रा में फोलिक एसिड, आयरन और ओमेगा-3 का सेवन रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करता है।

वजन को रखें नियंत्रित

शरीर का सही वजन रखना जरूरी इसील‍िए है, क्योंकि कम या ज्‍यादा वजन होने से ओव्यूलेशन में रुकावट आ सकती है। इसके अलावा, शराब कम करना, धूम्रपान छोड़ना, तनाव को मैनेज करना और नींद को प्राथमिकता देना भी इस द‍िशा में अहम कदम हैं, लेकिन अक्सर इन्हें कम आंका जाता है।

सही समय पर लें फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह

एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि आम तौर पर 30 साल से कम उम्र की महिलाओं को 12 महीने तक कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंसी न होने पर फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। वहीं, 35 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए यह समय सीमा छह महीने की होती है। जल्दी मदद लेना हार नहीं, बल्कि समझदारी भरा कदम है। ध्‍यान रखें क‍ि आज IUI और IVF जैसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद से 30 और 40 की उम्र की कई महिलाएं अपना परिवार पूरा कर पा रही हैं।

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